सीबीआई ने मंगलवार को बोफोर्स दलाली मामले में जाँच को प्रभावित करने के कथित प्रयास के लिए पूर्व विदेशमंत्री माधवसिंह सोलंकी पर मुकदमा चलाने की माँग की है।
एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने स्विट्जरलैंड में जाँच को प्रभावित करने के लिए 1992 में अपने स्विस समकक्ष को जाली दस्तावेज दिए।
सोलंकी ने फरवरी 1992 में दावोस की अपनी आधिकारिक यात्रा के वक्त स्विट्जरलैंड के विदेशमंत्री रेने फेल्बर को कथित तौर पर बिना हस्ताक्षर वाला और जाली ज्ञापन दिया ताकि उस समय मामले में सबूत जुटाने के लिए दिल्ली की एक अदालत द्वारा जारी लेटर ऑफ रोगेटरी पर वे गलत राय बना सकें।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आरके यादव के समक्ष दलील देते हुए सीबीआई ने चल रही न्यायिक प्रक्रिया में सबूत गढ़ने के लिए सोलंकी पर मुकदमा चलाने की माँग की। सीबीआई ने दावा किया कि पूर्व विदेशमंत्री के खिलाफ ठोस सबूत हैं।
जाँच एजेंसी ने 2003 में अपराध दंड संहिता की धारा 340 के तहत अदालत में एक आवेदन दाखिल कर कुख्यात मामले में विदेशी अधिकारियों से सबूत जुटाने में सहयोग की माँग करते हुए आरोप लगाया था कि तत्कालीन मंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग किया और न्यायिक आदेश को समाप्त करने का प्रयास किया। सीबीआई की दलील का विरोध करते हुए सोलंकी के वकील ने कहा कि अभियुक्त पर मुकदमा चलाने से कोई उद्देश्य हल नहीं होगा क्योंकि बोफोर्स मामले में काफी समय खप चुका है, जो 1990 से लंबित है।
सीबीआई ने इसका प्रतिवाद करते हुए दावा किया कि मामले में विलंब अभियुक्त की ओर से हुआ, जिन्होंने विभिन्न मौकों पर ऊपरी अदालतों की शरण ली।
प्रशासनिक आदेश पर हाल ही में सीबीआई न्यायाधीश आई के कोचर का स्थान लेने वाले एएसजे यादव ने आवेदन पर अपना आदेश 17 मई तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
सोलंकी को अप्रैल 1992 में पीवी नरसिंहराव सरकार से इस्तीफा देना पड़ा था क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर संसद में स्वीकार किया था कि उन्होंने स्विस मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है।
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