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एटमी करार पर वामदलों ने सफाई माँगी
28 मई को फिर होगी बैठक
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से भारत केंद्रित सुरक्षा उपाय समझौते पर वाम दलों का समर्थन हासिल करने का सरकार का एक और प्रयास मंगलवार को निष्फल हो गया, लेकिन दोनों पक्षों ने फिर 28 मई को साथ बैठने का फैसला किया।

भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर संप्रग-वाम समिति की आज आठवीं बार बैठक हुई और इसमें गहराई से भारत तथा आईएईएई के बीच सुरक्षा संधि पर चर्चा की गई। वाम दलों ने ईंधन की निर्बाध आपूर्ति, पूर्ण नागरिक परमाणु सहयोग, बराबरी के लेन-देन और भारत की विदेश तथा सुरक्षा नीतियों पर हाइड कानून के प्रभाव जैसे प्रमुख मुद्‍दों पर सफाई माँगी।

कम्युनिस्ट पार्टियाँ अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और भारत के बीच हुए सुरक्षा समझौते के बारे में सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी से संतुष्ट नहीं हुईं और उन्होंने इस पर और स्पष्टीकरण की माँग की है।

विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के निवास पर लगभग दो घंटे तक चली इस बैठक में वाम दलों की इस माँग पर सरकार ने अगले कुछ दिनों में उसे इस बारे में और स्पष्टीकरण देने का वादा किया। बैठक में फैसला किया गया कि इन स्पष्टीकरणों को उपलब्ध करा दिए जाने के बाद समिति की अगली बैठक 28 मई को होगी।

माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने बैठक के बाद बताया कि भारत और आईएईए के बीच हुए भारत केन्द्रित सुरक्षा समझौते के बारे में विस्तार से हुई चर्चा के दौरान वाम दलों की ओर से कई सवाल उठाए गए, जिस पर सरकार ने अगले कुछ दिनों में उन्हें ये स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने का वायदा किया है।

येचुरी की मौजूदगी में मुखर्जी ने कहा कि समिति की 28 मई 2008 को होने वाली अगली बैठक में आगे विचार विमर्श किया जाएगा। उन्होंने बताया कि समिति की आज की बैठक में पृथ्वीराज चव्हाण को छोड़कर बाकी सभी सदस्य उपस्थित थे। चव्हाण शहर में नहीं होने के कारण नहीं आ सके।

विदेशमंत्री ने स्वीकार किया कि वाम दलों ने आईएईए और भारत के बीच भारत केन्द्रित सुरक्षा समझौते के बारे में और अधिक स्पष्टीकरण माँगा है।

बैठक में शिरकत करने वाले फारवर्ड ब्लॉक के नेता देबब्रत विश्वास ने कहा कि सरकार चाहती थी कि समिति सुरक्षा संधि पर आईएईए के बोर्ड आफ गवर्नर की मंजूरी के लिए उसे आगे बढ़ने की अनुमति दे, लेकिन कुछ और सफाई माँगी गई।

समिति की अगली बैठक से पहले वाम दल 23 मई को अपनी रणनीति बनाने के लिए बैठक करेंगे। वामपंथी दलों ने विवाद समाधान और समझौता समाप्त करने सहित कुछ तकनीकी पहलुओं पर भी स्पष्टीकरण माँगा है।
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