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अखिलेश बनेंगे बसपा के 'दास'
राज्यसभा सदस्यता और कांग्रेस से इस्तीफा
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश दास द्वारा मंगलवार को राज्यसभा में पार्टी और सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही यह चर्चा यकीन में बदल गई है कि वे अपने समर्थकों सहित सत्तारूढ़ दल बसपा में शीघ्र ही शामिल हो जाएँगे।

जिस दिन दास की मंत्रिमंडल से इस्पात राज्यमंत्री के पद से छुट्टी हुई थी, तभी से चर्चा बलवती हो चली थी कि दास कांग्रेस छोड़ बसपा में शामिल होंगे।

उन्होंने भले ही राहुल गाँधी के कंधे पर बंदूक रखकर इस्तीफे की गोली चलाई हो कि राहुल चाटुकारों से घिरे हैं, लेकिन इसमें सच्चाई से ज्यादा रणनीति है क्योंकि ऐसा कहकर वे बसपा सुप्रीमो मायावती को खुश करना चाहते हैं, जिनके निशाने पर आजकल राहुल ही हैं।

मंत्रिमंडल से दास को हटाने के पीछे मुख्य वजह उनका बसपा प्रेम ही था। उनका राज्यसभा की सदस्यता का कार्यकाल कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाला है। वे अपनी महत्वाकांक्षा के चलते ऐसा कुछ कर रहे थे, जो आलाकमान को पसंद नहीं आया।

होली पर लखनऊ संसदीय क्षेत्र में अखिलेश दास ने बतौर इस्पात राज्यमंत्री रहते क्षेत्र के मतदाताओं को लाखों की संख्या में स्टील के डिब्बों में रंग और मिठाई बाँटी। आरोप है कि उन्होंने कर्नलगंज विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक योगेश प्रतापसिंह को भरे सदन में पाला बदलवाकर बसपा में शामिल कराया।

जानकारों बताते हैं इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री के एक सचिव जो लखनऊ के जिलाधिकारी रह चुके हैं, को माध्यम बनाया। लखनऊ में दास समानांतर कांग्रेस पार्टी चला रहे थे।

नगर एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष उन्हीं के 'पे-रोल' पर काम करते हैं। पिछला लोकसभा चुनावों में अटलबिहारी वाजपेयी के विरुद्ध मंजूर अहमद को दास ने ही चुनाव लड़ाया था। इस बात की जानकारी राहुल को अपनी लखनऊ यात्रा में मिल गई थी।
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