अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा दुनिया के खाद्यान्न संकट के लिए भारतीय मध्यम वर्ग की बढ़ती हुई नई खान-पान समृद्धि विवादास्पद टिप्पणी पर प्रधानमंत्री के शीर्ष सलाहकार का मानना है कि दरअसल यह टिप्पणी भारतीयों के आर्थिक विकास तथा समृद्धि को अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। इस बात का कतई बुरा नहीं मानना चाहिए।
भारत-अमेरिका परमाणु करार तथा जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री के शीर्ष सलाहकार तथा पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने मंगलवार को इंडियन वूमेन प्रेस कोर के साथ बातचीत में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेशमंत्री कोंडोलीजा राइस तथा बुश की इस आशय की टिप्पणियाँ इस बात की सबूत हैं कि दुनिया यह मानने लगी है कि भारतीयों ने बहुत प्रगति की है तथा भारतीय मध्यम वर्ग एक बढ़ती हुई व्यापारिक शक्ति के रूप में मान्य किया जाने लगा है।
गौरतलब है कि दोनों ने विश्व के खाद्य संकट के लिए चीन तथा भारत के मध्यम वर्ग के बढ़ते हुए समृद्ध खान-पान को दोषी ठहराया था।
सरन ने कहा कि खाद्य, ऊर्जा संकट तथा विश्व के बदलते हुए पर्यावरण, इन सबसे हमें मिलकर निबटना होगा। इसके लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराने से कोई फायदा नहीं होगा।
|