लोकसभा की कार्यवाही सोमवार को तय कार्यक्रम से चार दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। भाकपा ने इसे कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता के खेल की मिलीभगत करार दिया।
25 फरवरी को शुरू हुए बजट सत्र को नौ मई तक चलना था, लेकिन नाटकीय घटनाक्रम के बीच सोमवार सुबह शुरू हुई बैठक में विपक्षी सदस्य 32 सांसदों का मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपने के खिलाफ खामोश बैठे रहे।
अध्यक्ष ने निर्मला देशपांडे को श्रद्धांजलि देने के तुरंत बाद बैठक बिना कोई कारण बताए दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दो बजे दोबारा सदन बैठने पर चटर्जी ने 32 सांसदों के अनुचित आचरण का मुद्दा विशेषाधिकार समिति को भेजने के फैसले पर पुनर्विचार की घोषणा की।
इससे पहले सदन के नेता प्रणब मुखर्जी और नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने सदन को सुचारु चलाने में सहयोग देने का आश्वासन देते हुए अध्यक्ष से आचरण मुद्दे को विशेषाधिकार समिति को सौंपने के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया।
हालाँकि दोनों नेताओं के आग्रह से पूर्व आडवाणी ने चटर्जी से उनके कक्ष में मुलाकात की थी। उसके बाद अध्यक्ष के कमरे में सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें इस बारे में सहमति बनी थी।
सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राजद के देवेंद्र प्रसाद यादव ने कक्ष में विपक्ष द्वारा आचरण के बारे में कही गई बातों को भी सदन में रखने की माँग की। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के कमरे में हुई बैठक का ब्योरा जब एक चैनल में आ रहा है तो उसे सदन में रखने में क्या बुराई है।
सपा के रामगोपाल यादव ने अध्यक्ष के कक्ष में हुई बैठक का विवरण सदन के समक्ष आने से पहले चैनल पर प्रसारित किए जाने पर कार्रवाई की माँग की।
चटर्जी ने इसके बाद आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने की कार्यवाही पूरी की और उसके बाद वंदे मातरम् गान के बाद सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि यह कांग्रेस और भाजपा के बीच अवसरवादी तालमेल का नतीजा है कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक किए बिना कार्यवाही स्थगित कर दी और दलों को विश्वास में नहीं लिया गया।
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