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बुश का बयान अहंकार का प्रतीक-माकपा
दुनिया में अनाजों की बढ़ी हुई कीमतों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बयान को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टने साम्राज्यवादी मानसिकता का द्योतक कहा है।

पार्टी नेता सीताराम येचुरी ने यहाँ सोमवार को कहा कि बुश चाहते हैं कि तीसरी दुनिया कुपोषित बनी रहे, ताकि अमेरिका का उच्च जीवन स्तर बना रहे। यह साम्राज्यवादी मानसिकता के अलावा कुछ और नहीं है।

उन्होंने कहा इससबुश की वास्तविकता के प्रति घोर अज्ञानता का परिचय मिलता है। भारत में 80 फीसदी आबादी 20 रुपए प्रति दिन से भी कम आय पर गुजारा कर रही है। देश में प्रति व्यक्ति अनाजों की खपत उपलब्धता भी घटी है। ऐसे में भारत पर आरोप आपत्तिजनक है।

येचुरी ने कहा कि अगर मान लिया जाए कि भारत में अनाज की खपत बढ़ी है तो भी इससे दुनिया पर कोई असर पड़ने नहीं जा रहा है, क्योंकि भारत का वैश्विक अनाज बाजार में महज 0.3 फीसदी का योगदान है।

महिला आरक्षण विधेयक सही कदम : येचुरी ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए विधेयक लाए जाने के सरकार के संभावित कदम को 'देर आयद दुरुस्त आयद' बताया। उन्होंने इसका विरोध करने वालों को अपनी आपत्ति संसद में रखने की सलाह भी दी।

माकपा नेता ने कहा कि सूचना के अनुसार सरकार मंगलवार को विधेयक राज्यसभा में पेश कर रही है। उन्होंने माँग की कि विधेयक मूल स्वरूप में ही पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा सरकार ने संप्रग के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में इस विधेयक का वादा किया है और उसे इसका सम्मान करना ही चाहिए।

महिला आरक्षण का विरोध कर रहे दलों के बारे में येचुरी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी मुद्दे पर अपने विचार रखना गलत नहीं है, लेकिन किसी मुद्दे पर विरोध का यह अर्थ नहीं है कि विधेयक को पेश होने ही नहीं दिया जाए। येचुरी ने राजनीतदलोसे अपील की कि वे विधेयक संसद में पेश होने दें व अपनी आपत्तियाँ संसद में रखें। जरूरहो तो संशोधन भी लाएँ।

15 मई को देशव्यापी आंदोलन : येचुरी ने कहा महँगाई को लेकर माकपा 15 मई को देशभर में उग्र आंदोलन करेगी। इसके तहत जिलों में गिरफ्तारियाँ और रास्ता रोको, रेल रोको जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। येचुरी ने कहा कि पार्टी ने महँगाई रोकने के लिए प्रधानमंत्री को जो ज्ञापन सौंपा है, उसे अमल में लाने के लिए पार्टी सरकार पर दबाव बनाए रखेगी।

येचुरी ने संसद को विपक्षी दलों द्वारा बार-बार बाधित किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए कहा कि आज दुनिया में भारत की संसद ही ऐसी है, जिसकी बैठकें सबसे कम होती हैं।

उन्होंने कहा हमारे यहाँ साल में प्रायः 100 से कम बैठकें होती हैं और कुछ वर्षों में तो यह औसत घट कर 80 से भी कम हो गया है।
राजनीतिक दल चाहें तो संसद की कार्रवाई बाधित किए बिना ही अपनी आपत्तियाँ और विरोध भी सशक्त तरीके से संसद में रख सकते हैं।

माकपा नेता ने कहा राजनीतिक दलों को यह नहीं भूलना चाहिए कि संसद की जितनी कम बैठकें होंगी उतनी ही सरकार जनता के प्रति कम जवाबदेह होगी।
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