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बुश के बयान पर केन्द्र की चुप्पी शर्मनाक
भाजपा ने विश्व में खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों के लिए भारत को जिम्मेवार ठहराने की अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की टिप्पणी पर चुप्पी साधने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को सोमवार को संसद में उठाएगी।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी पर सरकार की चुप्पी को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि सरकार को इस गैर जिम्मेदाराना बयान के लिए अमेरिका को माकूल जवाब देना चाहिए।

नकवी ने प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह पीएम ऑन डेपुटेशन साबित हुए हैं, जो न तो देश के मोर्चे पर सफल हो रहे हैं और न ही विदेशी मोर्चे पर। प्रधानमंत्री ठीक उसी तरह का व्यवहार कर रहे हैं जैसे कोई डेपुटेशन पर नियुक्त अधिकारी अपना डेपुटेशन का समय काटता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस पद पर बचे हुए कुछ समय में कम से कम देश के सम्मान और स्वाभिमान से तो समझौता नहीं करना चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस तरह का बयान देकर 'बम इंस्पेक्टर' से 'ब्रेड इंस्पेक्टर' की भूमिका में आ गए हैं। भारत के लोग अपनी थाली में क्या और कितना खाते हैं, इसका हिसाब हमें अमेरिका को देने की जरूरत नहीं है।

भारत पर दबाव बनाने की कोशिश : भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि बुश की टिप्पणी का मकसद उस देश द्वारा प्रस्तावित कृषि नीतियों को स्वीकारने के लिए भारत पर दवाब बनाना है। गौरतलब है कि बुश ने बयान दिया था कि दुनियाभर में खाद्यान्न की कमी की वजह भारतीय मध्यम वर्ग की अच्छे खाने के लिए बढ़ती माँग है।

बलराम जाखड़ भी बरसे : महँगाई के लिए बुश द्वारा भारतीय मध्यम वर्ग को जिम्मेदार ठहराने संबंधी बयान की तीखी आलोचना करते हुए मध्यप्रदेश के राज्यपाल डॉ. बलराम जाखड़ ने कहा कि भारत की तरक्की और लोगों की खुशहाली से किसी को दु:खी होने की जरूरत नहीं है।

भोपाल के हबीबगंज स्टेशन पर 'साइंस एक्सप्रेस' का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने अमेरिकी राट्रपति बुश के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने महँगाई के लिए भारतीय मध्यम परिवार को दोषी ठहराते हुए कहा था कि बेहतर पौष्टिक भोजन की माँग बढ़ने से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं।
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