मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
रोजेलिनी के रोमांस में मददगार थे नेहरू
पत्रकार पडगाँवकर की किताब में खुलासा
इतालवी फिल्म के दिग्गज कलाकार और हॉलीवुड की जानी- मानी अभिनेत्री इन्ग्रिड बर्गमेन के पति रोबेर्टो रोजेलिनी भारत में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक बंगाली लड़की के साथ अपने रोमांस की वजह से विवादों में घिर गए थे। रोमांस के दौरान उनकी मदद की थी पंडित जवाहरलाल नेहरू ने।

यह खुलासा वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पडगाँवकर ने अपनी किताब 'अंडर हर स्पेल रोबेर्टो रोजलिनी इन इंडिया' में किया है।

किताब में कहा गया है रोजेलिनी प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आमंत्रण पर दिसंबर 1956 में भारत आए। उन दिनों भारत स्वतंत्रता के बाद विकास की राह पर अग्रसर हो रहा था और रोजलिनी इस पर कुछ फिल्में बनाना चाहते थे।

पडगाँवकर ने लिखा है क‍ि यहीं उनकी मुलाकात वृत्तचित्र निर्माता हरिसाधन दासगुप्ता की पत्नी और दो बच्चों की माँ सोनाली दासगुप्ता से हुई। भारतीय समाज में इस रोमांस ने तहलका मचा दिया और बाँबे फिल्म उद्योग के एक खेमे ने इसका जम कर विरोध भी किया। इस खेमे की नाराजगी का कारण एक विदेशी फिल्म निर्माता को नेहरू का संरक्षण मिलना था।

रोजेलिनी और 27 वर्षीय सोनाली का रोमांस इंडिया मातृभूमि फीचर फिल्म की शूटिंग के दौरान शुरू हुआ था। रोजेलिनी के अनुसार इस फिल्म का उद्देश्य विश्व का भारतीयों से परिचय कराना था, लेकिन विवादों के कारण इसे फिल्म्स डिवीजन के दस्ते की मदद से चार किश्तों में पूरा करना पड़ा।

सोनाली के प्यार में डूबे रोजेलिनी का वीजा समाप्त हो गया, लेकिन काम पूरा नहीं हो पाया था। भारतीय मीडिया इस रोमांस के बारे बहुत खबरें दे रहा था।

उसका दावा था कि भारत सरकार ने रोजेलिनी की परियोजना पर बड़ी रकम खर्च की थी और उनके पास रोजेलिनी के वीजा की अवधि आगे बढ़ाने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था ताकि रोजेलिनी अपना काम जितना जल्द हो पूरा कर सकें।

किताब के अनुसार नेहरू के आलोचकों को रोजेलिनी- सोनाली के रोमांस ने अच्छा मौका दे दिया था, लेकिन रोजेलिनी के हौसले पस्त नहीं हुए। जब उन्हें हालात बेकाबू होते दिखे तो वे नेहरू की शरण में चले गए।

रोजेलिनी ने बर्गमेन का सहारा लिया, तब नेहरू लंदन में थे। बर्गमेन उनसे नेहरू की बहन ब्रिटेन में भारत की तत्कालीन राजदूत विजयलक्ष्मी पंडित के सरकारी आवास पर मिलीं।

वह नेहरू को यह समझाने में कामयाब हो गईं कि भारत में रोजेलिनी को समस्याएं हो रही हैं, इसलिए उन्हें उनकी फिल्म सहित देश छोड़ने की अनुमति दी जाए। नेहरू ने कहा कि उन्हें काम पूरा कर जाने की अनुमति दी जाएगी।

इसके बाद नेहरू ने अपनी सरकार के अधिकारियों के साथ कई बार पत्र व्यवहार किया। पडगांवकर के अनुसार इससे नेहरू की सोच का पता चलता है। संभवत: उन्हें आशंका थी कि यह पूरा मामला नस्ली विवाद खड़ा कर सकता है। अंतत: 1957 के आखिर में रोजेलिनी यूरोप लौट गए। उनके मन में नेहरू के लिए गहरा सम्मान था।

रोजेलिनी ने नेहरू के लिए कहा था क‍ि वह लौह इरादों वाले व्यक्ति हैं। एक सुलझा हुआ समाजवादी, एक प्रधानमंत्री, जो भारत को आधुनिक लोकतंत्र बनाना चाहता है।

तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद रोजेलिनी और नेहरू की मित्रता प्रगाढ़ होती गई। अपनी फिल्म के बारे में रोजेलिनी ने बार-बार कहा कि वह एक पर्यटक की नजर से देश को दिखाना चाहते थे। हाथियों, बाघों और बंदरों की भरमार वाली इस फिल्म में भारतीय जनजीवन की अच्छी झलक पेश की गई थी।

रोजेलिनी का देहांत 1977 में इटली में हुआ था। भारत से लौट कर उन्होंने शेष जीवन इटली में बिताया। सोनाली और उनके दोनों बच्चे रोजलिनी के अधिकृत निवास नोमेन्ताना में रहते थे।
और भी
विजयकांत ने की रामदास की आलोचना
भारत के साथ बुश का भद्‍दा मजाक-एंटनी
प्यार खींचता है मुझे-यश चोपड़ा
ग्रामीण भारत में सक्रिय हैं नक्सली-अमेरिका
संप्रग-वाम समिति की बैठक गुरुवार को
अपराध में आगे है राष्ट्रीय राजधानी