हम दर्शकों के सामने बिलकुल अलग अंदाज की फिल्में पेश करने की कोशिश करते हैं। 'काबुल एक्सप्रेस', 'चक दे इंडिया' व 'आ जा नच ले' इन्हीं कोशिशों का नतीजा है।
यह कहना है मशहूर फिल्मकार यश चोपड़ा का। रुपहले पर्दे पर 'धूल का फूल' से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत करने वाले चोपड़ा ने कहा कि एक्शन से लगाव नहीं होने के बावजूद उन्होंने दीवार, त्रिशूल और काला पत्थर जैसी फिल्में बनाईं।
अपनी फिल्मों में रोमांस की अधिकता पर उन्होंने कहा कि फिल्मों में अगर हीरो- हीरोइन होंगे तो सतही तौर पर ही सही, लेकिन रोमांस तो होगा ही।
यशराज ने कहा प्यार एक ऐसा शब्द है, जो खुशहाल जिन्दगी जीने की चाहत से जुड़ा हुआ होता है। यह एक ऐसी भावना है, जो कभी खत्म नहीं हो सकती।
यशराज चोपड़ा ने कहा प्यार और खुशहाली दो ऐसे शब्द हैं, जो मुझे हमेशा आकर्षित करते रहे हैं। उन्होंने बताया मैंने आईएस जौहर के सहायक के तौर पर करियर की शुरुआत की थी। बाद में बड़े भाई बीआर चोपड़ा ने पहली बार धूल का फूल फिल्म का निर्देशन सौंपा।
गौरतलब है कि यश चोपड़ा ने सत्तर के दशक की शुरुआत में यशराज फिल्म्स नाम से प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की। इसके बैनर तले बनने बाली पहली फिल्म दाग (1973) थी।
उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वे बेहतरीन अभिनेता होने के साथ ही शानदार व्यक्तित्व के धनी भी हैं। उनके साथ काम करना एक अच्छा अनुभव रहा है।
यशराज को उनकी फिल्मों के लिए वर्ष 1965 से 2008 तक बारह बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिल चुका है। उनकी फिल्मों में दाग, कभी-कभी, नूरी, काला पत्थर, सिलसिला, नाखुदा, सवाल, मशाल, फासला, लम्हे, आईना, डर, साथिया, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे, बंटी और बबली आदि प्रमुख हैं।
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