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अपराध में आगे है राष्ट्रीय राजधानी
तीन माह में 134 लोगों की हत्या
चार महीने में हत्या तथा हत्या के प्रयास के 300 मामले। वाहन चोरी के लगभग दो हजार पाँच सौ मामले। ये राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपराध के इस साल के पहले चार महीने के आँकड़े हैं।

सूत्रों के मुताबिक पिछले महीने हत्या के 20 मामले दर्ज किए गए, जबकि हत्या के प्रयास के 30 मामले दर्ज किए गए। पिछले महीने यहाँ सनसनीखेज गोलीबारी तथा रिहायशी इलाकों में घरों में घुस कर हमला करने की कई वारदातें हुईं। इनका नतीजा मौत ही रहा।

राजधानी में मई माह के पहले ही दिन कुल पांच लोगों की हत्या कर दी गई। दो मई को दक्षिण दिल्ली इलाके में दोहरे हत्याकांड ने राजधानी को हिला कर रख दिया।

राष्ट्रीय राजधानी में अपराध का औसत राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक है। दिल्ली में औसतन प्रत्येक एक लाख लोगों में 357.2 अपराध होते हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत प्रत्येक एक लाख लोगों में 167.7 है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में नगर में हत्या के 134 मामले दर्ज किए गए, जबकि 119 मामले हत्या के प्रयास के थे।

मार्च तक दो हजार 244 वाहन चोरी की शिकायत दर्ज की गई। पिछले साल यह आँकड़ा आठ हजार 39 था। दिल्ली में वाहन चोरी पूरे देश की अपेक्षा अधिक है।

अन्य अपराधों पर नजर डालें तो इस साल 31 मार्च तक राजधानी में बलात्कार के 107 मामले, छेड़छाड़ के 134, डकैती के 135, चेन स्नेचिंग के 271 और घायल करने के 479 मामले दर्ज किए गए।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया हत्या के अधिकतर मामलों में पुलिस हस्तक्षेप नहीं कर सकी और अपराध नहीं रोक पाई। दिल्ली की जनसंख्या घटती- बढ़ती रहती है। अपराध होने का यह भी एक कारण हो सकता है।

राजधानी में विभिन्न मुद्दों को लेकर हत्याएँ की गई हैं। इन मुददों में दूध कंटेनर को खाली करने से इनकार करना, शराब के नशे में तथा रुपए उधार देने से मना करने जैसे कारण प्रमुख हैं।

अधिकारी ने बताया कि हत्या और हत्या के प्रयास के अधिकतर मामलों के पीछे निजी दुश्मनी, संपत्ति विवाद तथा अन्य बड़े कारण रहे हैं।

पिछले साल इसी समय में वर्ष 2006 के 462 मामलों की अपेक्षा हत्या की 467 घटनाएँ दर्ज की गईं। हत्या के प्रयास के 493 मामले दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2006 में यह आँकड़ा 493 था।
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