उच्चतम न्यायालय ने उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा दायर एक अपील पर केन्द्र और चीनी मिलों से जवाब तलब किया है। प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसका कथित तौर पर गन्ना किसानों के बीच भेदभाव के रूप में प्रभाव पड़ता है।
न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर स्थगनादेश देने से इंकार करते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय, बस्ती शुगर मिल कंपनी बजाज हिन्दुस्तान व बजाज हिन्दुस्तान शुगर एंड इंडस्ट्रीज को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 12 मई को होगी।
उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने कहा कि वह आदेश राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) के विपरीत है, जो उत्तरप्रदेश गन्ना आपूर्ति एवं खरीद का नियमन कानून 1953 के तहत तय किया गया।
उच्च न्यायालय ने 2007-08 के दौरान 81.81 रुपए प्रति क्विंटल के वैधानिक न्यूनतम मूल्य के हिसाब से भुगतान करने का निर्देश दिया, जो केन्द्र सरकार ने तय किया था।
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