मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं ने एक फैसले में कहा है कि रमजान में अगर उपचार के लिए किसी पुरुष के गुप्तांग से दवा डाली जाती है तो उसका रोजा नहीं टूटेगा, लेकिन महिला के साथ ऐसा करने पर उसका रोजा टूट जाएगा।
देश की विभिन्न प्रमुख मुस्लिम संस्थाओं और मदरसों ने एक संयुक्त फैसले में यह निर्णय किया है। फैसले में कहा गया कि पुरुष के लिंग में ट्यूब डालने या उसके जरिये दवा डालने से उसका उपवास नहीं टूटेगा।
हालाँकि महिलाओं के संदर्भ में कहा गया कि अगर गर्भाशय की जाँच के लिए योनि के जरिये चिकित्सा उपकरण से दवा दी जाती है तो रोज़ा खारिज हो जाएगा।
भारतीय इस्लामी फिकह अकादमी के मुख्य मुफ्ती अहमद नादिर अल काज़मी ने इस आरोप को गलत बताया कि यह फैसला महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव बरते जाने को इंगित करता है। उन्होंने कहा कि कुदरत ने महिलाओं और पुरुष की शरीर संरचनाओं को एक-दूसरे से काफी अलग बनाया है। उलेमाओं का मानना है कि लिंग का रास्ता मेदे तक नहीं जाता जबकि योनि का रास्ता उस तक पहुँच सकता है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए महिला और पुरुषों के बारे में यह अलग-अलग फैसला दिया गया है, जबकि चिकित्सकों का कहना है कि पुरुष या महिला दोनों के ये गुप्तांग मेदे से जुड़े हुए नहीं हैं।
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