पाकिस्तान की सरकार ने आगामी आदेश तक भारतीय नागरिक सरबजीतसिंह की फाँसी को टाल दिया है। सरबजीत के वकील राणा अब्दुल हमीद ने कहा कि 'हाँ उसकी फाँसी को पाकिस्तान सरकार या पाकिस्तान के राष्ट्रपति की ओर से अगले आदेश मिलने तक टाल दिया गया है।'
गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी कमल शाह के हवाले से आई खबर के मुताबिक सरबजीतसिंह की फाँसी पर रोक लगा दी गई है। वकील ने कहा कि संभावना है कि सरबजीत की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया जाए। चूँकि वह पहले ही उम्रकैद जितने वर्ष जेल में गुजार चुका हैड इसलिए उसकी रिहाई भी हो सकती है।
लाहौर में वर्ष 1990 में हुए बम विस्फोट कराने के आरोप में हिरासत में लिया गया सरबजीत पाकिस्तान की जेल में 18 वर्ष गुजार चुका है।
लाहौर की कोट लखपत जेल के अधीक्षक मलिक मुबाशिर अहमद खान के हवाले से खबर दी है कि खान ने गृह मंत्रालय के आदेश को पढ़ा जिसमें लिखा था अगले आदेश तक भारतीय नागरिक सरबजीत की फाँसी पर रोक लगाई जाती है।
सरबजीत के वकील राणा हमीद ने भारतीय टीवी चैनलों को बताया कि सरबजीत को पाकिस्तान की सरकार और राष्ट्रपति की ओर से माफी मिलने की उम्मीद है।
सरबजीत के परिवार का कहना है कि वह गलत पहचान का शिकार हुआ है। उसे एक अप्रैल को फाँसी दी जानी थी। हालाँकि पहले सरबजीत की क्षमा याचिका ठुकरा चुके पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने उसकी फाँसी को 30 अप्रैल तक टाल दिया था।
सरबजीत की बहन दलबीर ने अमृतसर में कहा कि पाकिस्तान सरकार के इस निर्णय के प्रति धन्यवाद देने के लिए उसके पास शब्द नहीं हैं। उसने कहा कि इस कदम से यह लगता है कि पाकिस्तान की सरकार सरबजीत को माफी देने का मन बना चुकी है।
दलबीर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी, राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और पाकिस्तान के पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी का शुक्रिया अदा किया है।
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट सरबजीत को सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ दायर की गई याचिका को पहले ही ठुकरा चुकी है।
दलबीर कौर ने कहा कि अब उसे उम्मीद है कि पाकिस्तान की सरकार सरबजीत को रिहा कर देगी। लाहौर में वर्ष 1990 में हुए विस्फोट के बाद गिरफ्तार हुए सरबजीत के परिवार का कहना है कि उसे किसी और प्रांत से मंजीतसिंह समझकर गिरफ्तार किया गया था।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि सरबजीत की फाँसी रोकने के निर्णय से विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शाह मेहमूद कुरैशी के बीच इस्लामाबाद में 20 और 21 मई को होने वाली बातचीत के लिहाज से अच्छा संदेश जाएगा।
पर्यवेक्षकों के अनुसार इस मौके पर अगर सरबजीत को फाँसी दी जाती तो भारत और पाकिस्तान के बीच समग्र बातचीत शुरू करने के लिए होने वाले प्रयासों पर गहरा असर पड़ सकता था।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अगला आदेश जारी होने तक सरबजीत की फाँसी रोकने के निर्देश मुशर्रफ ने दिए हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि सरबजीत की फाँसी की सजा उम्रकैद में तब्दील हो सकती है।
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