तिब्बत के मौजूदा संकट और क्षेत्र में शांति बहाली के तौर तरीकों पर विचार-विमर्श के लिए शनिवार को बीजिंग में चीनी सरकार और दलाई लामा के प्रतिनिधि मिलेंगे। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे चीन के झुकने और दलाई लामा से बातचीत शुरू करने का फैसला करने के एक सप्ताह से ज्यादा समय बाद यह बातचीत होने जा रही है।
तिब्बत की निर्वासित सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि दलाई लामा के विशेष दूत लोदी ग्याल्त्सेन ग्यारी और दूत केलसंग ज्ञाल्त्सेन चीनी नेतृत्व के प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक बातचीत करेंगे। बातचीत के दौरान दूत तिब्बती क्षेत्र में मौजूदा संकट के तात्कालिक मुद्दे को उठाएँगे।
तिब्बत की निर्वासित सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार वे स्थिति से निबटने के चीनी अधिकारियों के तौर तरीके के बारे में दलाई लामा की चिंताओं से उन्हें अवगत कराएँगे और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए उपाय सुझाएँगे।
संवाद जारी रखने की चीन की मंशा के मद्देनजर बयान में कहा गया कि दलाई लामा के दूत तिब्बत मुद्दे के एक-दूसरे के लिए संतोषप्रद समाधान के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे।
तिब्बत में मार्च में व्यापक विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के मद्देनजर भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्र से जुड़े मुद्दे के समाधान के लिए दलाई लामा से बातचीत का चीन पर दबाव बना रहा था। चीन ने 25 अप्रैल को घोषणा की थी कि वह दलाई लामा के दूतों से बातचीत करने को तैयार है।
घोषणा का जवाब देते हुए दलाई लामा ने स्पष्ट किया कि बातचीत का तब तक कोई लाभ नहीं होगा, जब तक वह गंभीर न हो। उन्होंने कहा था कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह की बातचीत। यदि वे बातचीत के प्रति गंभीर हैं तो बहुत स्वागत है। सिर्फ आमने-सामने बैठना पर्याप्त नहीं है।
|