पुणे में पैतृक संपत्ति को लेकर कर विवाद से सिंधिया परिवार को शुक्रवार को कुछ राहत मिली और आयकर अपीली न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि अधिग्रहण मूल्य की अनुपस्थिति में इस बिक्री पर पूँजी लाभ कर नहीं लागू होगा।
पुणे में भूखंड बिक्री के मामले में फैसला सुनाते हुए आयकर अपीली न्यायाधिकरण की मुंबई पीठ ने कहा हमारा मानना है कि यह मामला सिंधिया के पक्ष में जाना चाहिए। यह भूखंड मूल रूप से पेशवाओं द्वारा अधिग्रहीत किया गया था और इसे जीवाजीराव सिंधिया को बतौर तोहफा दे दिया गया था।
न्यायाधिकरण ने कहा कि भूखंड तोहफे में हासिल किया गया और इसका मूल्य शून्य था। विवाद उस समय पैदा हुआ जब आकलन करने वाले अधिकारी ने सिंधिया परिवार के स्वामित्व वाले भूखंड पर पूँजी लाभ कर लगा दिया। इस कर के लगाने के बारे में बाद में आयकर आयुक्त (अपील) ने पुष्टि की।
सिंधिया ने इस फैसले के खिलाफ न्यायाधिकरण में अपील की। उन्होंने कहा कि पुणे के आँधी में स्थित भूखंड उनके पूर्वज जीवाजीराव सिंधिया को उनकी चिमनाबाई के साथ शादी के दौरान बतौर तोहफा दिया गया था। चिमनाबाई पेशवाओं की पुत्री थी, जो उस समय दक्षिण के शासक हुआ करते थे।
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