मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
गाँधीवादी निर्मला देशपांडे का निधन
दाह संस्कार कल सुबह
महान गाँधीवादी और समाजसेवी निर्मला देशपांडे का आज सुबह यहाँ निधन हो गया। वे 79 वर्ष की थीं।

उनके पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि सुबह पाँच बजे के आसपास नियमित दिनचर्या निपटाने के बाद सुश्री देशपांडे अचानक मूर्छित होकर गिर गईं और वहीं दम तोड़ दिया।

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनका दाह संस्कार उनकी बहन के पुणे से यहाँ पहुँचने के बाद कल सुबह लोदी रोड स्थित शवदाहगृह में किया जाएगा। उनके पिता स्वर्गीय पीवाई देशपांडे मराठी के लेखक थे।

'दीदी' के नाम से मशहूर सुश्री देशपांडे राज्यसभा में मनोनीत सदस्य थीं। गत मंगलवार को वे बिहार दौरे से लौटकर आई थीं और कल सदन में भी उपस्थित थीं। उन्हें वर्ष 2006 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्मविभूषण' से सम्मानित किया गया था।

सुश्री देशपांडे के निधन की खबर सुनकर अनेक राजनीतिज्ञ और स्थानीय नागरिक राजधानी के शाहजहाँ रोड स्थित उनके सरकारी आवास पहुँच गए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके आवास पर सबसे पहले पहुँचने वाले राजनीतिज्ञों में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और गृह राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल शामिल हैं।

17 अक्टूबर 1929 को महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मीं सुश्री देशपांडे 1952 में विनोबा भावे के मशहूर 'भूदान आंदोलन' से जुड़ीं। उन्होंने विनोबाजी के साथ 40 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की थी।

उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक पुस्तकों की रचनाएँ की, जिनमें 'विनोबा के साथ', 'क्रांति की राह पर','सीमांत', 'विनोबा' और 'सेवाग्राम ते सेवाग्राम' जैसी कृतियाँ शामिल हैं।

उन्होंने गाँधीवादी चिंतन के प्रचार-प्रसार के लिए जर्मनी, अमेरिका ब्रिटेन, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, जापान, ताईवान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश की यात्राएँ की थीं। उन्होंने विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य के रूप में तीन बार सोवियत संघ की और आठ बार पाकिस्तान की यात्राएँ की थीं।

सोनिया ने शोक जताया : संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने प्रख्यात गाँधीवादी निर्मला देशपांडे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

अपने शोक संदेश में श्रीमती गाँधी ने कहा कि निर्मला देशपांडे के आकस्मिक निधन के समाचार से मैं स्तब्ध रह गई। उनके न रहने से एक समर्पित जीवन का अंत हो गया।

उन्होंने कहा कि देश के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में वे गाँधीवादी मूल्यों और विनोबाजी के सिद्धांतों की प्रतीक बन गई थीं। समाज में रचनात्मक कार्यकर्ताओं के लिए उनका जीवन निरंतर प्रेरणास्पद रहा।

उन्होंने कहा कि आदर्शों के प्रति समर्पित ऐसी निष्ठावान महान महिला के देहावसान पर मैं दु:ख और अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूँ।

शांति और अहिंसा की अग्रदूत थीं निर्मला
और भी
रानी मुखर्जी बनीं ब्रांड एंबेसडर
शीघ्र सुनवाई मौलिक अधिकार-सुप्रीम कोर्ट
मनमोहन ने बालू का बचाव किया
गर्मी का कहर जारी, मृतक संख्‍या 39
खामोश! मैं अभिनेता भी हूँ-शत्रुघ्न
विदेशी युवती के बलात्कारी को उम्रकैद