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रफी भी मुरीद थे मन्ना डे की गायिकी के
एक मई को जन्मदिन पर विशेष
हिन्दी फिल्मी संगीत के स्वर्णिम दौर में जब सारी दुनिया मोहम्मद रफी की गायिकी की दीवानी थी। उस वक्त मोहम्मद रफी जैसे महान गायक ने एक बार कहा था कि आप लोग मेरे गाने सुनते हैं, लेकिन मैं केवल प्रबोध चंद्र डे यानी मन्ना डे को सुनता हूँ।

मन्ना डे के नाम से लोकप्रिय प्रबोधचंद्र डे का जन्म एक मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज से स्नातक की उपाधि हासिल की थी। मन्ना डको कुश्ती और मुक्केबाजी का बेहद शौक था।

मन्ना डे के चाचा संगीताचार्य केसी डे का मन्ना डे पर गहरा प्रभाव पड़ा। शास्त्रीय संगीत की प्रारंभिक शिक्षा केसी डे और उस्ताद दाबिर खाँ से पाई। बाद में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा उन्होंने उस्ताद अमान अली खाँ और उस्ताद अब्दुल रहमान खाँ से हासिल की।

मन्ना डे ने 18 सितंबर 1953 में केरल की सुलोचना कुमारन के साथ विवाह किया। उनकी दो बेटियाँ हैं। केवल शास्त्रीय संगीत में सराबोर गाने ही नहीं बल्कि मन्ना डे ने ऐ मेरी जोहरा जबीं..., यारी है ईमान मेरा यार...और 'ये इश्क इश्क...जैसी कव्वाली रूमानी युगल गीतों तेज गानों देशभक्ति गीत भावनाप्रधान गीतों और प्रार्थना गीतों को अपना सुर देकर अमर बना दिया।

मोहम्मद रफी ने एक बार संवाददाताओं से बात करते हुए कहा था आप लोग मेरे गाने सुनते हैं और मैं केवल मन्ना डे को सुनता हूँ। फिल्म संगीतकार शंकर बसंत बहार के लिए गाने रिकॉर्ड कर रहे थे और नायक पर फिल्माये जाने वाले गाने के लिए जाने माने शास्त्रीय गायक भीमसेन जोशी के साथ युगल गीत केतकी गुलाब जूही...गाने के लिए उन्होंने मन्ना डे को चुना।

गाने की रिकॉर्डिंग के बाद स्वयं भीमसेन जोशी ने मन्ना डे से कहा मन्ना दा आप एक बेहतरीन शास्त्रीय गायक बन सकते है। आम तौर पर हमेशा ही मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले मन्ना डे ने एक बार इस बारे में पूछे जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा था मैं हमेशा प्रेस से दूरी बनाए रखता हूँ क्योंकि मेरा ऐसा मानना है कि मीडिया हमेशा गॉसिप और तथ्यहीन बातों को खबर बनाता है, जिसका कोई आधार नहीं होता।

रफी मुकेश और किशोर से पहले मन्ना डे ने अपना पहला गाना 1943 में फिल्म 'तमन्ना' में सुरैया के साथ गाया था और फिल्म 'रामराज्य' के लिए इसी साल पहला एकल गीत गाया था। मन्ना ने अंतिम फिल्मी गीत 'प्रहार' के लिए गाया था। मन्ना डे ने हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' को भी अपनी आवाज दी है, जो काफी लोकप्रिय है।

मन्ना डे ने अपनी गायिकी के सफर में विभिन्न भारतीय भाषाओं में लगभग 3500 से अधिक गाने गाए। उन्होंने अपने दौर के सभी संगीतकारों के साथ गाने गाए लेकिन मन्ना डे के पसंदीदा संगीतकार आरडी बर्मन थे।

वह कहते है आरडी का काम करने का तरीका सभी संगीतकारों से एकदम अलग था। भारत सरकार ने मन्ना डे को संगीत के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए पद्म भूषणऔर पद्मश्री सम्मान से नवाजा।

इसके अलावा 1969 में मेरे हजूर और 1971 में बांग्ला फिल्म निशि पद्मा के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी उन्हें दिया गया। उन्हें मध्यप्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा और बांग्लादेश की सरकारों ने भी विभिन्न पुरस्कारों से नवाजा है।
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