प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने उद्योग जगत को अल्पकालिक फायदों के प्रति आगाह किया और लागत में हो रहे इजाफे को समाहित कर शुल्कों में कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुँचाकर मुद्रास्फीति से मुकाबला करने में मदद करने की अपील की।
सीआईआई की सालाना बैठक में मनमोहन ने उद्योग जगत के प्रमुखों से कहा कि मुझे बगैर लाग लपेट के कहने दीजिए कि उद्योग और व्यापार समूह को अल्पकालिक फायदे के लालच से दूर रहना चाहिए और विकास प्रक्रिया को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करने में सरकार की मदद करनी चाहिए।
सिंह ने उद्योग जगत से यह अपील उस वक्त की है जबकि कुछ ही समय बाद भारतीय रिजर्व बैंक की सालाना मौद्रिक नीति की घोषणा होने वाली है और मुद्रास्फीति की दर तीन साल के उच्चतम स्तर यानी सात फीसदी से उपर है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल में कीमतों में हुई तेजी पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं। साथ ही उन्होंने मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के संबंध में उद्योग को उनकी जिम्मेदारी भी याद दिलाई।
गोलबंदी के खिलाफ परोक्ष रूप से आगाह करते हुए सिंह ने कहा कि प्रमुख उद्योगपति खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ कुछ उत्पादकों के पास बाजार की शक्तियाँ हैं ऐसे उद्योगपतियों पर महँगाई को काबू में करने के लिए सरकार की मदद करने की सामाजिक जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और खाद्य कीमतों में आई तेजी की वजह महँगाई का दबाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदारी कारकों की ओर ध्यान दिलाते हुए सिंह ने कहा कि उद्योग को लागत में हुई बढ़ोतरी का बोझ जितना हो सके खुद सहन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उद्योग को चाहिए कि वह कर और शुल्क में हुई कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाए। इस्पात क्षेत्र का उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने कहा कि उनके आह्वान पर इस्पात कंपनियों ने अगले तीन महीने तक कीमतें स्थिर रखने की घोषणा की है।
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