प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने सोमवार को देश के प्रत्येक नागरिक से आग्रह किया है कि वह आगे आएँ और बालिकाओं के सशक्तिकरण में हर प्रकार का सहयोग दें। उन्होंने कहा कि इस काम की शुरुआत घर से होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री आज 'बालिका बचाओ' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय बैठक का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वास्तव में महिलाओं के विरुद्ध सामाजिक असमानता की शुरुआत हमारे घरों से ही होती है। यहाँ तक कि यह लड़की के जन्म लेने से भी पहले ही शुरू हो जाती है। सिंह ने कहा कि यह विडंबना है कि यह असमानता हमारे देश के सबसे समृद्ध राज्यों पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि वे यह बात भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं कर रहे हैं बल्कि इस गर्व से भरपूर होकर कह रहे हैं कि वे खुद तीन बालिकाओं के पिता हैं। देश की प्रत्येक बालिका के लिए उनकी वही इच्छा है, जो अपनी बालिकाओं के लिए है। मनमोहन ने कहा कि बालिका भूण हत्या की प्रवृत्ति सबसे अधिक अमानवीय असभ्य और घृणित कार्य है। पितृ सत्तात्मक मानसिकता और बालकों को वरीयता दिया जाना ऐसी मूल्यहीनता है, जिसे कुछ चिकित्सक लिंग निर्धारण परीक्षण जैसी सेवा देकर बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि देश के कुछ समृद्ध राज्यों में बालिका भ्रूण हत्या की प्रवृत्ति अधिक पाई जा रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनगणना-2001 के अनुसार एक हजार बालकों में बालिकाओं की संख्या पंजाब में 798, हरियाणा में 819 और गुजरात में 883 है, जो एक चिंता का विषय है। इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ अन्य राज्यों ने अपने यहाँ इस घृणित प्रवृत्ति को गंभीरता से लिया और इसे रोकने के लिए अनेक प्रभावकारी कदम उठाए जैसे गुजरात में 'डीकरी बचाओ अभियान' चलाया जा रहा है। इसी प्रकार से अन्य राज्यों में भी योजनाएँ चलाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल सरकार नहीं कर सकती है। बालिका बचाओ अभियान को सफल बनाने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी बहुत ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि देश में पिछले चार दशकों से छह साल से कम आयु के बच्चों के लिंग अनुपात में लगातार गिरावट आ रही है। वर्ष 1981 में एक हजार बालकों के पीछे 962 बालिकाएँ थीं। वर्ष 2001 में यह अनुपात घटकर 927 हो गया, जो एक चिंता का विषय है। यह इस बात का संकेत है कि हमारी आर्थिक समृद्धि और शिक्षा के बढ़ते स्तर का इस समस्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
मनमोहन ने कहा कि वर्तमान समय में इस समस्या को दूर करने के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए साथ-साथ प्रसव से पूर्व तकनीकी जाँच अधिनियम को सख्ती से लागू करना चाहिए और जीवन बचाने वाली आधुनिक प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग रोकना का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए।
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