विपक्ष ने सोमवार को लोकसभा में सड़क परिवहन और जहाजरानी मंत्री टीआर बालू के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की कोशिश की लेकिन अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की कड़ाई और भावुक अपील की वजह से 35 मिनट के शोर-शराबे के बाद सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से प्रारंभ हो गई।
सदन की बैठक सुबह शुरू होते ही अध्यक्ष और सदस्यों ने सबसे पहले 10 उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी।
इसके तुरंत बाद विपक्षी राजग के सदस्य बालू के पुत्रों की कंपनियों के मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लिखे गए आठ कथित पत्रों और बालू के मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की माँग करने लगे। चटर्जी ने इस पर कहा कि इस मुद्दे को अभी उठाने की वह अनुमति नहीं दे सकते और इस मामले को नियमों के तहत ही उठाया जा सकता है।
भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा और जदयू नेता प्रभुनाथसिंह ने इस मामले को उठाने देने की अनुमति की माँग करते हुए कहा कि इस संबंध में कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया गया है। अध्यक्ष ने कहा कि वह नियमों के तहत ही मामले को उठाने की अनुमति देंगे और किसी दबाव में नहीं झुकेंगे। अध्यक्ष द्वारा मामले को उठाने की अनुमति नहीं देने और शून्यकाल में भी यह मुद्दा उठाने का कोई आश्वासन नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्य उत्तेजित हो गए और अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारेबाजी करने लगे। विपक्ष ने प्रधानमंत्री और बालू पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने किन परिस्थितियों में पत्र लिखे।
विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के जवाब में सत्ता पक्ष के सदस्य भी खड़े हो गए और सदन में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से बार-बार प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखाई दिया।
अध्यक्ष ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों पर कड़ाई और अपील दोनों का कोई असर नहीं देखते हुए अध्यक्ष ने सामान्य कामकाज के लिए भावुक अपील करते हुए कहा मुझे अपनी इज्जत नहीं चाहिए, लेकिन जनता और संसद की इज्जत की जानी चाहिए।
अध्यक्ष के यह कहने पर विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर चले गए और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से शुरू हो गई तथा प्रश्नकाल चला।
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