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रेलवे बॉलीवुड की राह पर
यात्री और माल भाड़े के जरिए शानदार मुनाफा कमाने के बाद भारतीय रेलवे अब बॉलीवुड की ओर रुख कर रहा है।

रेल विभाग अब फिल्म निर्माताओं को ट्रेनों के प्लेटफार्म और स्टेशनों के रूप में अपना व्यापक बुनियादी ढाँचा फिल्मांकन के लिए उपलब्ध कराएगा। इस नए कारोबार को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने फिल्म सेल का गठन किया है।

मध्य रेलवे के प्रवक्ता एके जैन ने बताया कि पहले फिल्म निर्माताओं को हमारे स्थानों पर शूटिंग करने के लिए अनुमति माँगने की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।

जैन ने कहा कि इस उद्यम के जरिये हम अतिरिक्त राजस्व का सृजन कर सकेंगे जिससे यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को सुधारने में मदद मिलेगी।

मध्य रेलवे जिसके अंतर्गत पुणे कल्याण और मुंबई की स्थानीय ट्रेनें आती हैं, ने वर्ष 2005-06 के 33 लाख रुपए के आँकड़े के मुकाबले पिछले वर्ष 82 लाख रुपए का मुनाफा कमाया है।

जैन ने कहा कि यशराज फिल्म्स की लागा चुनरी में दाग, संजय गुप्ता की दस कहानियाँ और शाहिद व करीना कपूर अभिनीत फिल्म जब वी मेट उन दर्जनों फिल्मों में शामिल हैं जिनकी पिछले वर्ष मध्य रेलवे के अलग-अलग स्थानों पर शूटिंग की गई थी।

फिल्मकारों की दिलचस्पी को देखते हुए रेलवे ने अपने शुल्क में भी बदलाव किए हैं। शुल्क को 10 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है।

जैन ने कहा कि ट्रेनें भारतीय जनता की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। मुंबई की लोकल ट्रेनें यहाँ के आम लोगों की जीवन रेखा के समान हैं। कोई भी फिल्म जिसमें मुंबई एक विषय हो वह बिना इन ट्रेनों को दर्शाये संपूर्ण नहीं कहलाएगी।

फिल्मों में ट्रेनों को दिखाने का चलन नया नहीं है। वर्ष 1936 में प्रदर्शित हुई अशोक कुमार और देविका रानी अभिनीत फिल्म अछूत कन्या की शूटिंग भी ट्रेन के डिब्बों में हुई थी।

इसी तरह रवि चोपड़ा की वर्ष 1980 में प्रदर्शित हुई फिल्म दि बर्निंग ट्रेन में भी रेलवे के स्टेशनों का इस्तेमाल किया गया था।
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