आम आदमी के उपयोग में आने वाली वस्तुओं की कीमत में बेतहाशा वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार महँगाई के झूठे आँकडे़ पेश कर महँगाई कम होने का दावा कर रही है।
संघ के मुखपत्र (ऑर्गनाइजर) में प्रकाशित संपादकीय लेख (मुद्रास्फीति के झूठे सरकारी आँकड़े) में कहा गया है कि वास्तव में मुद्रास्फीति की दर दहाई के अँकों में पहुँच गई है तथा आवश्यक वस्तुओं के फुटकर मूल्य काफी बढ़ गए हैं। लेख के अनुसार अनेक आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों को थोक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के दायरे से बाहर रखा जा रहा है इस कारण सरकारी आँकड़े पूरी तरह भ्रामक हैं।
आँकड़ों के मायाजाल का जिक्र करते हुए संघ के मुखपत्र में कहा कि पिछले तीन साल से बहुत सी आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों को अद्यतन नहीं किया गया है इस कारण एक ओर सरकार महँगाई कम करने का दावा कर रही है वहीं आम आदमी को बाजार में बढ़ती कीमतों से जूझना पड़ रहा है।
महँगाई को काबू करने के लिए सरकार के कदमों की आलोचना करते हुए संघ ने कहा कि सरकार कुछ वस्तुओं का आयात शुल्क कम कर रही है और कुछ वस्तुओं के निर्यात पर रोक लगा रही है, लेकिन इन सब उपायों से आम आदमी को कोई राहत नहीं मिल रही है, बल्कि केवल पूँजीपतियों और विदेशी कंपनियों को ही फायदा हो रहा है।
संघ ने आरोप लगाया है कि बढती महँगाई ने मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों की कलई खोल दी है तथा विपक्षी दलों ने सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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