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महँगाई की मार, दबाव में सरकार
मुद्रास्फीति की दर 12 अप्रैल को समाप्त हफ्ते में बढ़कर 7.33 फीसदी हो गई जिससे सरकार पर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रयास करने और भारतीय रिजर्व बैंक पर मुद्रा की आपूर्ति और सख्त करने का दबाव बन गया है। प्रधानमंत्री के महँगाई के राजनीतिकरण संबंधी बयान पर भी विपक्षी दलों समेत सहयोगी वामपंथी पार्टियों ने गहरा आक्रोश जताया है।

इसके पूर्व सप्ताह मुद्रास्फीति में हुई गिरावट कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के लिए तात्कालिक राहत साबित हुई थी। विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दल भी सरकार द्वारा कीमतों को काबू में करने के मामले में अपनाए गए रवैए की आलोचना कर रहे हैं।

दरअसल संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन देने वाले वामपंथी दलों के नेताओं ने शुक्रवार को मनमोहनसिंह से मुलाकात की और उनसे तेजी से बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा।

मुद्‍दा उठाना हमारा वैधानिक अधिकार : मुद्रास्फीति के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की मनमोहनसिंह की सलाह पर पलटवार करते हुए मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने आज कहा कि योग्य अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री के शासनकाल में आम आदमी से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने का राजनीतिक दलों को वैधानिक अधिकार है।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि महँगाई आम आदमी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला है। इस मुद्दे को उठाना राजनीतिक दलों का वैधानिक अधिकार है।

मनमोहन का बयान दुर्भाग्यपूर्ण : प्रधानमंत्री के बयान को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए येचुरी ने कहा कि जनता के मुद्दे को उठाना राजनीतिक दलों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि अगर इसका अर्थ जनता के मुद्दे को उठाना नहीं है तो हम राजनीतिक दल होते हुए ऐसा गैर जिम्मेदाराना कदम नहीं उठा सकते।

येचुरी के पार्टी सहयोगी बासुदेव आचार्य ने भी महँगाई के मुद्दे पर सरकार के रवैए की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का बयान यह साबित करता है कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है। वह लोगों की तकलीफों के बारे में बिलकुल भी गंभीर नहीं है।

वामपंथी प्रधानमंत्री से मिले : माकपा महासचिव प्रकाश करात ने प्रधानमंत्री के साथ 45 मिनट की मुलाकात के बाद बताया कि हम चाहते हैं कि कीमतों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। हमने प्रधानमंत्री के समक्ष छह माँगें रखी हैं और उम्मीद है कि इन्हें लागू करने के लिए सरकार तत्काल कदम उठाएगी। करात और बधोन के अलावा माकपा नेता सीताराम येचुरी भाकपा नेता डी. राजा और आरएसपी नेता अबनी राय भी मुलाकात के समय मौजूद थे।
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