महँगे खाद्य पदार्थों ने मुद्रास्फीति को बढ़ाकर 7.33 फीसदी कर दिया है, जिसने विपक्ष को सरकार पर वार करने का हथियार दे दिया है। हालाँकि सरकार ने बदले में यह कहते हुए धैर्य रखने की सलाह दी है कि कीमत पर नियंत्रण के संबंध में पहले से घोषित उपायों का परिणाम आने में वक्त लगेगा।
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने शुक्रवार को राजनीतिक दलों को कीमतों में हो रही बढ़ोतरी के मुद्दे के राजनीतिकरण से बचने की सलाह दी, जबकि वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने संसद को बताया कुछ दिनों में मुद्रास्फीति में गिरावट होगी, लेकिन हमें धैर्य रखना होगा।
अप्रैल 12 को समाप्त सप्ताह के दौरान गुड़, मछली, सूजी, मैदा, खांडसारी और नारियल तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के साथ प्रधानमंत्री ने अभाव का माहौल पैदा करने के खिलाफ आगाह किया है और सभी राजनीतिक दलों कहा कि वे लोगों की तकलीफों को राजनीतिक रंग देने के लालच से बचें।
आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है और राजनीतिक दलों को भय के कारोबार में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है।
इस पूरे मामले में एक अच्छी खबर यह है कि सब्जियों की कीमत गिरी है। इसी तरह 31 मार्च को केंद्र द्वारा शुल्कों में कमी करने के कारण आयातित तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज हुई।
लेकिन पिछले साल के 6.34 के उच्च आधार के बावजूद मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी हुई क्योंकि वैश्विक स्तर पर जिंसों की कीमतों में तेजी बरकरार है। पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति की दर 7.14 फीसदी थी।
सरकार द्वारा उठाए जा रहे राजकोषीय कदमों के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक भी मंगलवार को आने वाली सालाना मौद्रिक नीति में मुद्रा आपूर्ति को सख्त कर सकता है। रिजर्व बैंक ने पहले ही बैंकों द्वारा किए जाने वाले अनिवार्य नकद जमा में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो प्रणाली से 18 हजार 500 करोड़ रुपए सोख लेगा।
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