उच्चतम न्यायालय ने आज पोटा में निरुद्ध फरहान अहमद मुस्ताक की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और विहिप के अनेक नेताओं की हत्या की योजना बनाने के आरोप में पुलिस ने फरहान को गिरफ्तार किया था। जस्टिस अरिजीत पासायत और पी. सदाशिवम की एक पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि तुम पर पहले ही दोष सिद्ध हो चुका है। याचिका में अब कुछ बचता नहीं है। शीर्ष अदालत ने फरहान के इस दावे को अस्वीकृत कर दिया कि पुलिस ने उसको झूठे आरोप में गिरफ्तार किया था। फरहान अहमद को दिल्ली की पोटा अदालत ने सात साल कारावास की सजा सुनाई थी। वह गोधरा कांड के बाद सांप्रदायिक दंगों का बदला लेने के लिहाज से मोदी और प्रवीण तोगड़िया सहित अन्य वीएचपी नेताओं की हत्या की योजना में कथित भूमिका के कारण गुजरात में जाँच का सामना कर रहा है।
गुजरात पुलिस के अनुसार राज्य में गोधरा कांड के बाद लगाए राहत शिविरों में से अनाथ बच्चों के अपहरण में और उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद में इन बच्चों को जेहादी के रूप में और मोदी सहित अन्य नेताओं की हत्या के लिए प्रशिक्षण देने में फरहान शामिल था। उसको भादसं की धारा 120-ब (आपराधिक साजिश), 121, 123 के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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