सेना के लिए 3500 करोड़ रुपए की लागत से सतह से हवा में त्वरित मार करने वाली मिसाइल प्रणालियाँ खरीदने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्ताव आमंत्रित करने का अनुरोध पत्र 'आरएफपी' जारी कर दिया गया है।
उच्च पदस्थ रक्षा सूत्रों ने कहा कि यह अनुरोध पत्र रूस के रोसोबोरोंक्सपोर्ट, यूरोप की एनबीडीए, इसराइल की राफेल और अमेरिका की रेथियोन कम्पनियों को भेजा गया है।
रक्षा सूत्रों ने आरएफपी जारी होने की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मिसाइल की रेंज ढाई किलोमीटर रखी गई है ताकि शत्रु के विमान, हेलीकाप्टर, मानव रहित यान, यूएवी या सटीक वार करने वाले किसी अस्त्र को आकाश में ही नेस्तनाबूद किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल सेना के एयर डिफेंस शस्त्रागार में शामिल ओसा..एके मिसाइलों का स्थान लेंगी।
सूत्रों ने कहा कि सेना ने इस तरह की 18 मिसाइल प्रणालियों की जरूरत बताई है। प्रस्ताव में ऐसी मिसाइल की आवश्कता बताई गई है जो लक्ष्य के सामने आते ही कुछ ही सेकंड में उस पर वार कर सके और पूरी तैयारी की स्थिति में रहते हुए सभी दिशाओं में दुश्मन के लक्ष्य को वेध पाए।
यह भी संयोग ही है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विमान के मार्ग में सेंध लगने की खबर के एक दिन बाद ही रक्षा मंत्रालय ने यह अनुरोध पत्र जारी किया। यह बात और है कि बाद में यह पता चल गया था कि प्रधानमंत्री के विमान को 16 मिनट तक हवा में मंडराने को मजबूर करने वाली राडार पर उभरी चमक भारतीय वायु सेना के डोर्नियर विमान की थी।
रक्षा मंत्रालय से यह आरएफपी जारी रहने का अर्थ यह है कि अब भारत और इसराइल के रक्षा संबंधों के फिर से पटरी पर आने की सम्भावना है जो बराक मिसाइल सौदे में दलाली के आरोपों के कारण विवादों के घेरे में आ गए थे।
भारतीय सेना के लिए खरीदी जाने वाले इन मिसाइलों की होड़ में इसराइली मिसाइल स्पाइडर दौड़ में सबसे आगे खड़ी दिखायी देगी जो एक से लेकर 15 किलोमीटर महज 5 सेकंड के अंतराल में प्रतिक्रिया कर सकती है। स्पाइडर पर भारतीय सेना की निगाहें 2005 से ही लगी हुईं है जब इसे पहली बार पेरिस के एयरशो में प्रदर्शित किया गया था।
स्पाइडर मिसाइल 20 मीटर से लेकर 9000 मीटर तक की ऊँचाई पर उड़ान भर रहे लक्ष्य को वेध सकती है। इसे ट्रेटा वाहन पर लगाया जा सकता है और यह हर दिशा में वार कर सकती है।
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