भारतीय वायु सेना के लिए 42 हजार करोड़ रुपए की लागत से खरीदे जाने वाले 126 लड़ाकू विमानों के सौदे को हासिल करने के लिए काँटे की जंग प्रस्ताव भेजने की आखिरी तारीख समाप्त होने से पहले ही शुरू हो गई।
इस सौदे की होड़ में शामिल होने जा रही चार प्रमुख यूरोपीय देशों की विमान कम्पनी ईएडीएस ने गुरुवार को जर्मन, ब्रिटेन, स्पेन और इटली के राजदूतों और वहाँ की वायु सेना के अधिकारियों को प्रचार अभियान के मैदान में उतारा।
वायु सेना के लिए बहुद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीददारी का अंतरराष्ट्रीय टेंडर छह कम्पनियों को पिछले साल अगस्त में जारी किया गया था और प्रस्ताव भेजने की अंतिम तारीख समाप्त होने पर उसे आठ सप्ताह बढ़ाकर 28 अप्रैल कर दिया गया था।
ईएडीएस के मुख्यकार्यकारी अधिकारी ने गुरुवार को घोषणा की कि उनकी कम्पनी सोमवार को अपना प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को सौंपने जा रही है और इससे चार दिन पहले इस कम्पनी ने गुरुवार को यह आयोजन कर भारत को संदेश दिया है कि वह यह संबंध कायम करने के लिए कितनी उत्सुक है।
इस सौदे की होड़ में अमेरिका की दो दिग्गज कम्पनियाँ लॉकहीड मार्टिन और बोइंग भी शामिल हैं। इनके अलावा इसराइल के राफेल, स्वीडन के ग्रिपन और रूस के मिग 35 को सौदे की होड़ में आमंत्रित किया गया है। पाँचों देश अपने दावे को मजबूती देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ईएडीएस कम्पनी इस बार भारतीय कहावत ..दूध का जला छाछ भी फूंक मार कर पीता है' की तर्ज पर कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती क्योंकि सेना के लिए 197 हेलीकॉप्टरों की खरीददारी में ऐन मौके पर उसका सौदा रद्द हो गया था।
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