विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को फिर बेबाकी से स्वीकार किया कि भारत-अमेरिका परमाणु करार पर फिलहाल कोई आमसहमति नहीं है और वह इस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन सरकार अमेरिकी कांग्रेस में इस समझौते की पुष्टि के लिए जाने पर भारतीय संसद का अभिमत लेगी।
मुखर्जी ने यहाँ संसदीय सौंध परिसर में मीडिया कर्मियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सवाल-जवाब के दौरान कहा कि आज कोई आमसहमति नहीं है। मैं कोशिश कर रहा हूँ। उनसे पूछा गया था कि वाम दल परमाणु समझौते का विरोध कर रहे हैं और क्या इस मुद्दे पर आमसहमति बन गई है। इससे पूर्व भी विदेश मंत्री संसद में स्वीकार कर चुके हैं कि इस मुद्दे पर सभी दलों में आमसहमति नहीं है।
मुखर्जी ने कहा इसके पुष्टि के लिए अमेरिकी संसद में जाने से पहले हम संसद जाएँगे, ताकि सदन का अभिमत लिया जा सके हालाँकि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो हमारे रास्ते में आता हो।
यह पूछे जाने पर कि संप्रग वाम समन्वय समिति की बैठक की तारीख क्या तय हो गई है उन्होंने कहा कि तारीख तय हो जाएगी। पहले भी हम मिले हैं और आगे भी मिलेंगे।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु करार पर फिलहाल संसद का अभिमत लेने की स्थिति नहीं है, क्योंकि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि संसद परमाणु करार को लागू होने से रोक सकती है।
मुखर्जी ने कहा कि भारतीय परंपरा में अंतरराष्ट्रीय संधियों की संसद में पुष्टि का प्रावधान नहीं है लेकिन किसी भी संधि को लागू कराने के लिए अधिनियम बनाने की जरूरत पड़ती है और उस समय लाए गए विधेयक को रोककर संसद उस संधि को मूर्त रूप लेने से रोक सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु करार के तीन हिस्से हैं, जिसमें 123 समझौता, आईएईए सुरक्षा उपाय और एनएसजी से मंजूरी जैसी बातें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब समझौता अमेरिकी संसद में मंजूरी के लिए जाएगा तब भारत की संसद में जाने का सवाल पैदा होता है।
मुखर्जी ने कहा कि सबसे ज्यादा विरोध हाईड एक्ट का है लेकिन यह भारत की चिंता का विषय नहीं है। यह कानून अमेरिका पर लागू होना है और इसकी चिंता उसे करनी है।
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