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सीमेंट-इस्पात उद्‍योग को वित्तमंत्री चेतावनी
महँगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार कुछ और वित्तीय उपायों पर विचार कर रही है। वित्तमंत्री चिदंबरम ने संसद में कहा कि खाद्य वस्तुओं के कारोबार में बड़े औद्योगिक समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। लेकिन उन्होंने सीमेंट और इस्पात कंपनियों के गठजोड़ के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी अवश्य दी।

वित्तमंत्री ने राज्यसभा में कहा हमने कुछ वित्तीय उपाय किए हैं तथा कुछ वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध पर विचार किया जा रहा है। रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर अंकुश के लिए पिछले दिनों सीआरआर को 50 आधार अंक बढ़ा दिया है तथा 29 अप्रैल को मौद्रिक नीति से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

सीमेंट और इस्पात के दाम में बढ़ोतरी को रोकने के लिए इन कंपनियों के गठजोड़ के खिलाफ चेतावनी की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एमआरटीपी ने शुरुआती कार्रवाई की है तथा उद्योग एवं इस्पात मंत्रालय लगातार निर्माताओं से बातचीत कर रहे हैं।

टाटा, सेल दाम नहीं बढ़ाएगी : 40 प्रतिशत इस्पात बाजार पर कब्जा जमाए दो बड़ी कंपनियों टाटा स्टील और सेल ने कहा है कि वे महँगाई को रोकने के लिए इस्पात के दाम अगले दो-तीन महीने नहीं बढ़ाएँगी। कंपनियों ने यह कदम प्रधानमंत्री के इस्पात उद्योग से इस आग्रह के बाद उठाया कि वह कुछ समय के फायदे के लिए बाजार को अपने ढंग से न चलाए।

बड़ी मछलियों पर जाल डालें : राज्यसभा में सपा के अमरसिंह ने प्रश्नकाल में के दौरान कहा कि सरकार जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के अभियान के तहत सिर्फ छोटे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, वहीं बड़ी मछलियों को बख्शा जा रहा है। उन्होंने मुकेश अंबानी के रिलायंस फ्रेश, अडानी एक्सपोर्ट, आईटीसी आदि के खिलाफ क्या कार्रवाई की है? वित्तमंत्री ने कहा कि बड़ी और छोटी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई एस्मा के जरिये राज्य सरकारें ही कर सकती हैं।

वायदा कारोबार जिम्मेदार नहीं : योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलूवालिया ने कहा है कि बढ़ती महँगाई का आवश्यक वस्तुओं के वायदा कारोबार से कोई संबंध नहीं है। वायदा कारोबार पर रोक लगाने से खाद्य वस्तुओं के मूल्य सामान्य स्तर पर बनाए रखने में दिक्कत भी हो सकती है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अभिजीत सेन समिति की रपट ने भी यही बात कही है।

सिफारिशों पर सवाल : व्यापारिक संगठनों ने अभिजीत सेन समिति की सिफारिशों पर सवाल उठाए हैं। फोरम ऑफ दिल्ली ट्रेड एसोसिएशंस ने कहा कि कमोडिटी एक्सचेंजों ने अपने हक में प्रचार अभियान चला रखा है, जिससे सरकार वायदा कारोबार पर रोक नहीं लगा सकी है।
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