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बुंदेलखंड का मामला राज्यसभा में
राष्ट्रीय राजनीति को पिछले कुछ दिन से गर्माने वाले बुंदेलखंड के सूखे के सवाल पर प्रश्नकाल स्थगित नहीं किए जाने की अपनी माँग नहीं माने जाने के विरोध में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्यों ने मंगलवार को राज्य सभा से वाकआउट किया।

सदन की कार्यवाही शुरू होने पर बसपा के सतीश मिश्रा ने यह मामला उठाया तथा प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा की माँग की।

उन्होंने इसके साथ उत्तर प्रदेश की गंभीर होती जा रही वित्तीय स्थिति का मामला भी उठा दिया। सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने मिश्रा की अपील को अनसुना करते हुए उनसे कहा कि वह शून्य काल में अपनी बात कह सकते हैं। बसपा सदस्य ने कहा कि यह पहला मौका नही है जब किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा की माँग की जा रही है।

मिश्रा की दलील को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुरली मनोहर जोशी से समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से आए इस बयान से बड़ी विचित्र स्थिति पैदा हो गई है कि अब किसानों के और कर्जे माफ नही किए जाएँगे।

सभापति ने इस दौरान प्रश्नकाल चलाने की भरसक कोशिश की तथा आगाह किया कि उन्हे ऐसा नही करने दिया गया तो वह कार्यवाही स्थगित कर देंगे, जो उन्होंने अंततः 15 मिनट के लिए कर भी दी।

कार्यवाही दुबारा शुरू हुई तो बसपा सदस्य फिर अपनी पुरानी माँग दोहराने लगे। मिश्रा ने कहा कि इतने ज्वलन्त मुद्दे पर यदि प्रश्नकाल स्थगित नहीं किया जाता है तो उनकी पार्टी के सदस्य कार्यवाही में हिस्सा नही ले सकते। बसपा सदस्यों के वाकआउट के बाद प्रश्नकाल सामान्य रूप से चलने लगा।

लोकसभा में भारी शोरगुल-बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे की स्थिति पर चर्चा कराने की माँग को लेकर मंगलवार को लोकसभा में भारी शोर शराबा किया और कांग्रेस पर सूखे की स्थिति पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट किया।

इसी मुद्दे पर सुबह कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा कराने की जोरदार माँग तथा हंगामे, नारेबाजी के बीच हुए स्थगन के बाद 12 बजे जैसे ही कार्यवाही फिर शुरू हुई, बसपा सांसद ब्रजेश पाठक की अगुवाई में पार्टी के सभी सदस्य फिर अपनी सीटें छोड़ आगे बढ़ने लगे।

इसी बीच पार्टी संसदीय दल के नेता राजेश वर्मा ने हाल ही में बुंदेलखंड में कांग्रेस के महासचिव राहुल गाँधी के नेतृत्व में जिला प्रशासन के खिलाफ छेड़े गए संघर्ष की ओर इंगित करते हुए पार्टी पर सूखे की स्थिति का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया लेकिन इससे आगे वर्मा की बातें उन्हीं की पार्टी के सांसदो के शोर शराबे में डूब गईं।
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