सरकार ने मंगलवार को कहा कि सेनाओं का आधुनिकीकरण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस काम में धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, उसने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश के साथ सैन्य गठजोड़ नहीं किया जाएगा।
रक्षामंत्री एके एंटनी ने आज लोकसभा में रक्षा मंत्रालय से संबंधित अनुदान माँगों पर चर्चा का जवाब देते हुए यह आश्वासन भी दिया कि छठे वेतन आयोग कि सिफारिशों पर विचार के लिए गठित समिति सैन्यकर्मियों को बेहतर वेतनमान देने के मुद्दे और अनियमितताओं को दूर करने पर भी विचार करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह स्पष्ट कर चुके हैं कि सैन्यकर्मियों को उचित वेतनमान दिए जाएँगे।
एंटनी ने कहा कि सेनाओं का आधुनिकीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस वर्ष इस कार्य के लिए 37482 करोड़ रुपए रखे गए हैं। उन्होंने रक्षा बजट को उचित बताते हुए कहा कि वित्तमंत्री ने जरूरत पड़ने पर और धन देने का आश्वासन दिया है।
रक्षामंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकार किसी भी देश के साथ किसी तरह का सैन्य गठजोड़ नहीं करेगी और भारत अपनी स्वतंत्र नीति के अनुरूप चलेगा। उन्होंने बताया कि हम कई देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, लेकिन ये किसी देश विशेष के खिलाफ नहीं है।
उनका कहना था कि ऐसे सहयोग से क्षमता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ संयुक्त नौ सेना अभ्यास 1992 में शुरू हुआ था और तब से यह लगातार चल रहा है। रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम तथा कुछ अन्य देशों के साथ भी संयुक्त सैन्य अभ्यास किए गए हैं। इस वर्ष चीन के साथ भी अभ्यास किया गया और इस वर्ष के अंत में चीनी सेना यह अभ्यास करने भारत आएगी।
अमेरिका के साथ लॉजिस्टिक समझौता करने के बारे में कुछ सदस्यों की आशंकाओं पर एंटनी ने स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता की कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी यह समझौता किया नहीं किया गया है सिर्फ बातचीत चल रही है।
उन्होंने स्वीकार किया कि सीमा क्षेत्र में सड़क आदि बुनियादी सुविधाएँ बनाने में समस्या रही है, लेकिन अब सरकार इन क्षेत्रों में हवाई ठिकाने तथा रेल और सड़क संपर्क को प्राथमिकता देगी।
अरुणाचल प्रदेश को इसमें सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में 72 सड़कों को प्राथमिकता सूची में रखा गया है। रक्षामंत्री के जवाब के बाद सदन ने अनुदान माँगों के ध्वनिमत से पारित कर दिया।
पिछले वर्ष के रक्षा बजट की पूरी राशि खर्च न किए जाने की सदस्यों की शिकायत पर एंटनी ने कहा कि यह नहीं देखना चाहिए कि राशि किसी भी हालत में खर्च करनी ही है। उन्होंने कहा कि हथियार, उपकरण या प्रणाली के पूरी तरह परीक्षण में खरा उतरने पर ही उसकी खरीद की जाएगी। कुछ सौदों सौदो को इस आधार पर रद्द करने से राशि का पूरा उपयोग नहीं हुआ है। उन्होंने इस संदर्भ में यूरोकॉप्टर तथा तोप प्रणाली का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि बराक सौदे की जाँच चल रही है और उचित राय-मशविरे के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
रक्षामंत्री ने कहा कि हल्का लड़ाकू उन्नत विमान बनाने की परियोजना छोड़ी नहीं गई है। इसमें अधिक ऊँचाई तक उड़ान भरने में समस्या आ रही है और इसके लिए अधिक शक्तिशाली इंजिन की जरूरत है। अत: इसके लिए संयुक्त उद्यम पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विमान 2012 तक बनाने शुरू कर दिए जाएँगे।
आईएनएस जलाश्व के संबंध में उन्होंने कहा कि इसकी खरीद का निर्णय जाँच समिति की रिपोर्ट के बाद ही लिया गया है। यह कहना उचित नहीं है कि हम बेकार हो चुके पोत को खरीद रहे हैं।
एक रैंक एक पेंशन योजना बनाने की सदस्यों की माँग पर उन्होंने कहा कि वेतन आयोग ने इसे नहीं माना है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे का तर्कसंगत समाधान चाहती है और उम्मीद है कि आयोग कि सिफारिशों पर विचार के लिए गठित समिति इस पर भी विचार करेगी।
आत्मनिर्भरता के संबंध में रक्षामंत्री ने कहा कि सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि सेनाओं के लिए उपकरणों, हथियारों आदि की अधिकांश आपूर्ति देश के रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और आर्डिनेंस फैक्टरियों से की जाए। इसके अलावा देश के निजी क्षेत्र को भी इसकी अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति सिर्फ 26 प्रतिशत तक ही है।
उनका कहना था कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र सेना तथा नौसेना में शामिल किए जाने के लिए तैयार है। ब्रह्मोस के लिए कुछ देशों से भी माँग है, लेकिन काफी सोच-समझकर ही इस बारे में फैसला लिया जाएगा।
विभिन्न राज्यों में सैनिक स्कूल खोलने की माँग पर एंटनी ने कहा कि यदि राज्य सरकारें भूमि तथा बुनियादी सुविधाएँ दें और प्रतिवर्ष आने वाले खर्च में भागीदारी के लिए तैयार हों तो वहाँ ऐसे स्कूल खोले जा सकते हैं। केन्द्र सरकार अकेले यह खर्च नहीं उठाएगी।
उन्होंने बताया कि 51 सैनिक छावनी बोर्डों में जल्दी ही चुनाव होने वाले हैं। इनसे इन क्षेत्रों में जमीन के मामलों और लोगों की दूसरी समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी।
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