मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
शौकत गुरु की याचिका पर फैसला सुरक्षित
उच्चतम न्यायालय ने संसद पर हुए आतंकवादी हमले के मामले में 10 साल की सजा पाए शौकत हुसैन गुरु की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उसे संबंधित अपराध के लिए आरोपित किए बिना दोषी ठहराने और सजा सुनाने को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति पीपी नावलेकर और न्यायमूर्ति वीएस सिरपुरकर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता और दिल्ली पुलिस के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को भारतीय दंड संहिता की धारा 123 ए के तहत कभी आरोपित नहीं किया गया और किसी आरोपी को किसी भी मामले में बचाव का मौका दिये बिना दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

भूषण ने यह भी दलील की कि कानून की प्रक्रिया पर अमल किए बिना किसी व्यक्ति की आजादी को सीमित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि वैसे किसी मामले के लिए, जिसमें उसके मुवक्किल को कभी भी आरोपित नहीं किया गया हो, दोषी ठहराना और सजा सुनाना उसके मौलिक अधिकारों और मानवाधिकारों का हनन है
और भी
मुंबई भाजपा का नया अध्यक्ष होगा
महँगाई पर लगाम लगाने की कोशिशें
मुंडे को ठाकरे ने दी संयम की सलाह
'कान उत्सव' की ज्यूरी में प्रसून जोशी
कलाम ने नहीं उठाने दिया कश्मीर मुद्‍दा
सेवानिवृत्त मुख्य सचिवों में भी पद की लालसा!