परमाणु वैज्ञानिक से भारत के राष्ट्रपति बने एपीजे अब्दुल कलाम ने एक महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को कश्मीर का मुद्दा उठाने का अवसर ही नहीं दिया था।
कलाम के राष्ट्रपति काल में उनके सचिव रहे पीएम नायर ने अपनी पुस्तक में इस तथ्य का खुलासा किया। उल्लेखनीय है कि 17 अप्रैल 2005 में परवेज मुशर्रफ भारत और पाकिस्तान के बीच एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच देखने के लिए भारत की एक दिन की संक्षिप्त यात्रा पर आए थे।
नायर ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि दोनों राष्ट्रपतियों की मुलाकात से पूर्व उन्होंने कलाम से कहा था कि मुशर्रफ जरूर आपके समक्ष कश्मीर मुद्दे को उठाएँगे। इसके जवाब में कलाम ने उनसे कहा था कि चिंता मत करो मैं संभाल लूँगा।
यह सुनकर वे आर्श्चयचकित हो गए थे कि पूर्व में दोनों देशों के बड़े-बडे़ कूटनीतिज्ञ इस मसले को लेकर माथा पच्ची करते रहे हैं और इसी मसले को लेकर दोनों देशों के मध्य आगरा वार्ता विफल हो गई थी।
नायर ने लिखा है कि दोनों राष्ट्रपतियों के बीच उक्त मुलाकात का दिन बहुत से व्यस्त कार्यक्रमों से भरा हुआ था। उस दिन पाकिस्तान की क्रिकेट की टीम भारत के खिलाफ विजयी रही थी और मुशर्रफ ने महेन्द्रसिंह धोनी के लंबे बालों की तारीफ की थी।
शाम साढ़े सात बजे के करीब मुशर्रफ का काफिला राष्ट्रपति भवन परिसर में पहुँचा। उनके दल को राष्ट्रपति भवन की पहली मंजिल स्थित उत्तरी बैठकखाने में ले जाया गया। कलाम ने मुशर्रफ को बैठने के लिए कहा और वे खुद भी उनके पास बैठे। भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारी भी अपने निर्धारित स्थान पर बैठे।
खुशनुमा वाक्यों के आदान-प्रदान के बाद कलाम ने शुरुआत करते हुए कहा कि श्रीमान राष्ट्रपति भारत की ही तरह आपके देश में भी ग्रामीण क्षेत्र हैं। क्या आपको नहीं लगता कि हमें इन क्षेत्रों को विकसित करने के लिए जो भी संभव हो उसे प्राथमिकता के साथ करना चाहिए।
मुशर्रफ ने कहा-हाँ। कलाम बिना समय व्यर्थ गँवाए उनके पसंदीदा विषयों में से एक के बारे में विस्तृत बातचीत करने लगे। कलाम ने पाकिस्तान के जनरल से कहा श्रीमान राष्ट्रपति मैं आपको संक्षिप्त में पीयूआरए (पुरा) के बारे में कुछ बताऊँगा। पुरा का अर्थ ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।
फिर प्लाजमा टीवी इस तरह शुरू हुआ जैसे उसे कतार में ही रखा गया हो। इसमें पुरा के बारे में विस्तृत जानकारी दर्शाई गई। यह 26 मिनट तक चला।
मुशर्रफ ने इसमें गहरी दिलचस्पी दर्शाई और मुस्कराहट के साथ कहा- धन्यवाद श्रीमान राष्ट्रपति। भारत भाग्यशाली है, जो उसके पास राष्ट्रपति के तौर पर एक वैज्ञानिक है। इसके बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन कर विदाई ली।
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