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सेवानिवृत्त मुख्य सचिवों में भी पद की लालसा!
सेवानिवृत्त मुख्य सचिवों समेत बहुत से लोग राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के लिए राष्ट्रपति भवन तक लॉबिंग करते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सचिव रह चुके पीएम नायर ने अपनी पुस्तक में खुलासा किया है कि मैंने बहुत शर्मिंदा करने वाली यह बात देखी कि कुछ सेवानिवृत्त मुख्य सचिव भी, जो शानदार आईएएस सेवा से ताल्लुक रखते हैं, वे भी अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए अपने बायोडाटा भेजते हैं और कारण बताते हैं कि किस तरह वे राज्यपाल पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं।

नायर ने अपनी पुस्तक दी कलाम इफैक्ट 'माई ईयर्स विद दि प्रेसीडेंट' में कहा है राष्ट्रपति भवन को लोगों से अनेक सिफारिशी पत्र मिलते हैं, जिनमें वे पद्मश्री से लेकर भारतरत्न पुरस्कार तक किसी अन्य को या खुद को दिए जाने की वकालत करते हैं।

पुस्तक में कलाम को बतौर एक इनसान लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता उनकी ऊर्जाशीलता उनके सकारात्मक दृष्टिकोण और सिद्धांतों पर अटल रहने वाले व्यक्ति आदि अनेक पहलुओं पर रोशनी डाली गई है।

किताब में लिखा गया है कि कलाम के लिए कुछ भी गैर जरूरी नहीं था। नायर बताते हैं कि राष्ट्रपति खुद उन्हें भेजे गए सैकड़ों पत्रों और ई-मेल को पढ़ते थे।

राष्ट्रपति बनने के शुरुआत के कुछ हफ्तों के दौरान आगरा से एक बच्ची का उन्हें ई-मेल मिला, जिसमें लिखा था अंकल हमारे इलाके में केवल एक पार्क है और उस पार्क में केवल एक झूला है और वह भी पिछले दस सालों से बेकार पड़ा है। कोई उसकी चिंता नहीं करता।

इस पत्र के बाद कलाम ने नायर से कहा तो हमें क्या करना है। नायर ने कहा कि वह कलेक्टर से बात करेंगे और यह काम हो गया। इस पर बच्ची ने एक और मेल भेजा जिसमें कलाम का धन्यवाद किया गया था। बच्ची ने लिखा झूला अब काम कर रहा है।

कलाम को एक बार पुणे जिले के किसी गाँव से ताल्लुक रखने वाले एक गरीब आदमी का पत्र मिला जिसमें उसके परिवार के समक्ष आ रही वित्तीय दुश्वारियों का जिक्र किया गया था।

इस व्यक्ति ने यहाँ तक लिखा था कि उसने तत्काल सहायता के लिए जिला प्रशासन, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और केन्द्र सरकार तक का दरवाजा खटखटा लिया है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यदि राष्ट्रपति ने भी कुछ नहीं किया तो उसका परिवार आत्महत्या कर लेगा।

इस पर राष्ट्रपति को बताया गया कि यदि उन्होंने इस प्रकार के मामलों पर गौर करना शुरू कर दिया तो इसका कोई अंत नहीं होगा। नायर बताते हैं लेकिन कलाम इस बात से संतुष्ट नहीं हुए। कलाम अपने निजी खाते में से इस परिवार को कुछ आर्थिक मदद देने को तैयार थे ताकि परिवार को अतिवादी कदम न उठाना पड़े।

नायर ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को ऐसा न करने की सलाह दी और बताया कि इलाके के कलेक्टर को इस समस्या को देखने को कहा जाएगा और कुछ सहायता की जाएगी। लेकिन, यह खबर पहले पूरे गाँव में फिर जिले में फिर राज्य में और उसके बाद पूरे देश में फैल गई कि यदि आपको कोई समस्या है तो आप राष्ट्रपति को पत्र लिख सकते हैं।

इसके बाद कलाम का मेल बाक्स और राष्ट्रपति भवन के कर्मचारियों तक के मेल बाक्स पर हजारों ई-मेल आने लगे। कई लोगों ने यह रणनीति अपनाई और राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की और मदद नहीं मिलने की स्थिति में राष्ट्रपति भवन के सामने ही आत्महत्या करने की धमकी दे डाली।

लेकिन राष्ट्रपति ने इन सभी पत्रों को गंभीरता से लिया और अपने स्टाफ को स्पष्ट किया कि हम सब यहाँ लोगों की समस्याएँ सुलझाने के लिए हैं और इस प्रक्रिया का कोई छोटा रास्ता नहीं है।
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