सत्तारूढ़ कांगेस के एक सदस्य द्वारा राहुल गाँधी को 'युवराज' करार दिया जाना विपक्षी भाजपा ही नहीं सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाम दलों को भी रास नहीं आया तथा उन्होंने इसे लोकतंत्र का माखौल बताया।
राज्यसभा में ग्रामीण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए कांगेस के ईएम सुदर्शन नचिप्पन ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के मुद्दे पर झाँसी के मंडलायुक्त कार्यालय के बाहर धरना देकर राहुल गाँधी ने साबित कर दिया है कि वह लोगों और मेरी पार्टी के 'युवराज' हैं। नचिप्पन के बाद चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के बलवीर पुंज ने कहा यदि युवराज हैं तो राजमाता भी होनी चाहिए, महाराज भी होने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवराज स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद कांगेस और भाजपा सदस्यों के बीच आपसी नोकझोंक शुरू हो गई। कांगेस सदस्यों ने जहाँ कहा कि राजनीति में कौन व्यक्ति वंचित लोगों के साथ खाना रहा है और सो रहा है, वहीं भाजपा सदस्यों ने पलटकर सवाल किया कि क्या मंडल आयुक्त के कार्यालय के बाहर धरना देने से ग्रामीण गरीबी दूर हो गई।
|