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क्रीमी लेयर को बाहर रख आरक्षण दें
एक सप्ताह की अनिश्चितता के बाद सरकार ने आज आईआईएम और आईआईटी सहित सभी केंद्रीय उच्च शैक्षणिक संस्थानों को क्रीमी लेयर को बार रख अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए इसी साल से आरक्षण कार्यान्वित करने का निर्देश दिया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 10 अप्रैल के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों को दिशा निर्देश जारी किए।

उच्चतम न्यायालय ने 10 अप्रैल के अपने फैसले में उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण दिए जाने के सरकार के फैसले को बरकरार रखा था लेकिन क्रीमी लेयर को इसका लाभ दिए जाने से इंकार कर दिया था।

न्यायालय के आदेश के बाद भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) ने अपनी प्रवेश प्रक्रिया को स्थगित कर इस संदर्भ में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से सलाह माँगी थी।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को तीन साल में कार्यान्वित करने का पहले ही फैसला कर चुके हैं जिसकी शुरुआत 2008-09 से होगी और प्रत्येक वर्ष नौ प्रतिशत के हिसाब से सीटें आरक्षित की जाएँगी।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान अधिनियम के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण की नीति आगामी सत्र से खुद ही कार्यान्वित हो जानी चाहिए और यह सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगी। सिर्फ दक्षता, अनुसंधान और राष्ट्रीय सामरिक महत्व के संस्थानों को छोड़कर।

विस्तार चरण के एक विस्तृत कार्यक्रम पर शैक्षणिक संस्थान पहले ही काम कर चुके हैं और पर्यवेक्षण समिति की सिफारिशों को कार्यान्वित करने वाली उच्चाधिकार समिति से मंजूरी मिल चुकी है।

मंत्रालय ने आज शाम अपना परिपत्र जारी किया जिसमें कहा गया कि सभी केंद्रीय शैक्षक्षिक संस्थानों को अनुसूचित जाति के 15 तथा अनुसूचित जनजाति के 7.5 प्रतिशत के अतिरिक्त इसी शैक्षणिक सत्र से ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण कार्यान्वित करना होगा।

अधिनियम के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को स्नातक से नीचे स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर के सभी पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों में आरक्षण मिलेगा।

मंत्रालय ने कहा कि सरकार यूजीसी, बीसीआई, एमसीआई और एआईसीटीई जैसी उच्च संवैधानिक इकाइयों के साथ चर्चा कर उच्च विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों को आरक्षण के दायरे से बाहर कर सकती है।

राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति पिछले सप्ताह सरकार से क्रीमी लेयर को बाहर रख ओबीसी आरक्षण लागू करने की बात कह चुकी है। प्रत्येक केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान को ओबीसी उम्मीदवारों को प्रवेश देने के लिए अलग-अलग कट ऑफ सूची बनाने का अधिकार है।
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