चार साल से चल रही ये अफवाहें सही नहीं हैं कि तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सोनिया गाँधी को प्रधानमंत्री नियुक्त करने के इच्छुक नहीं थे बल्कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति का पत्र तैयार कर लिया था।
इतना ही नहीं ये अफवाहें भी गलत हैं कि कलाम ने सोनिया को प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने का सुझाव दिया था। कलाम के सचिव पीएम नायर ने यह रहस्योद्घाटन करते हुए उस समय राष्ट्रपति भवन में चल रही हलचलों पर रोशनी डाली है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति को पत्र पर हस्ताक्षर करने, सोनिया से हाथ मिलाने और उन्हें बधाई देने की सलाह दी गयी गई थी। कलाम को यह भी बताया गया था कि वह सोनिया से पूछें कि वे कब शपथ लेना चाहेंगी।
आम चुनाव में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिलने और मिला-जुला परिणाम आने के चार दिन बाद राष्ट्रपति ने पूछा था कि हमें क्या करना चाहिए।
नायर ने अपनी पुस्तक 'द कलाम इफेक्ट : माई ईयर्स विथ द प्रेसिडेंट' में कहा है कि राष्ट्रपति को सलाह दी गई थी कि उन्हें पहले इस बात से खुद को संतुष्ट करना चाहिए कि ऐसी कौन-सी पार्टी या पार्टियों का गठबंधन है, जो स्थिर सरकार दे सके और उसके बाद उस पार्टी या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।
अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं करने की बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पूछा कि अत: मुझे क्या करना चाहिए? अपने सहयोगियों की सलाह पर राष्ट्रपति ने 17 मई, 2004 को एक पत्र भेजा जिसमें सोनिया को उसी दिन राष्ट्रपति भवन आमंत्रित किया गया था।
कलाम को बताया गया था कि सोनिया विभिन्न पार्टियों के समर्थन के पत्रों के साथ आएँगी। नायर ने राष्ट्रपति को सलाह दी कि आपको उन सभी को पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ उन्हें सरसरी तौर पर देखिए और उसके बाद कार्रवाई कर दीजिए। नायर ने कलाम से कहा कि वे बगल के एडीसी के कमरे में सोनिया के प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्ति के पत्र के साथ मौजूद रहेंगे। नायर ने कलाम को सलाह दी कृपया इस पर हस्ताक्षर कीजिए, उनसे हाथ मिलाइए और उन्हें बधाई दीजिए। आप यह भी पूछें कि वे कब शपथ लेना चाहेंगी। कलाम ने इस पर कहा कि ठीक है। यह पुस्तक कल बाजार में उपलब्ध होगी।
नायर का कहना है कि उस समय चल रही अफवाहों के उलट कलाम ने सोनिया को कभी सलाह नहीं दी कि वे प्रधानमंत्री न बनें। सोनिया के विदेशी मूल के मुद्दे का ढिंढोरा पीटे जाने के बीच मीडिया में ऐसी अटकलें थीं कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस अध्यक्ष को प्रमुख पद स्वीकार नहीं करने का सुझाव दिया है।
नायर के अनुसार कलाम और सोनिया की मुलाकात संक्षिप्त और सौहार्दपूर्ण थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य प्रधानमंत्री के तौर पर सोनिया की नियुक्ति को पत्र सौंपना था।
अट्ठारह मई को कलाम के साथ सोनिया की मुलाकात दोपहर सवा बारह बजे तय की गई थी। सोनिया मनमोहनसिंह के साथ आईं। नायर ने कहा है कि मैं एडीसी कक्ष में इंतजार कर रहा था। बुलाए जाने के प्रति सतर्क मेरे पास भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति का राष्ट्रपति का पत्र था, जिस पर अभी दस्तखत नहीं हुए थे।
नायर के अनुसार समय बीता। घंटी बजी। मैं जल्दी से कागज लेकर गया, लेकिन पाया कि सोनिया और सिंह रवाना हो रहे हैं। कलाम ने उसके बाद नायर से कहा आपने मुझसे कहा था कि वे समर्थन पत्रों के साथ आएँगी, लेकिन वे सिर्फ विचार विमर्श के लिए आईं। उन्होंने (सोनिया ने) कहा कि वे अन्य दलों के समर्थन-पत्रों के साथ कल फिर आएँगी।
नायर ने उस दिन को याद करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति ने सोनिया से कहा कि कल तक इंतजार क्यों? मैं आज दोपहर बाद या शाम को किसी भी समय उपलब्ध हूँ। आप कृपया जितनी जल्दी आपके दस्तावेज तैयार हो जाएँ, उतनी जल्दी आइए। मेरे कागजात आपके लिए तैयार हैं।
इसके बाद संदेश आया कि सोनिया अगले दिन यानी 19 मई को रात सवा आठ बजे राष्ट्रपति से मिलेंगी। ठीक सवा आठ बजे सोनिया सिंह के साथ आईं। मैं बाहर के कमरे में इंतजार कर रहा था। समय बीता, घंटी बजी और मैं भीतर गया।
नायर ने लिखा है कि राष्ट्रपति ने मुझे बताया कि उन्हें सूचित किया गया है कि मनमोहनसिंह कांग्रेस पार्टी के नेता होंगे। पत्र में कहा गया कि उन्हें कांग्रेस संसदीय दल का नेता और पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नामित किया गया है। अन्य पार्टियों के समर्थन का पत्र भी था।
नायर ने कहा कि उसके बाद वे पत्र में बदलाव करने गए क्योंकि सिंह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा रहा था। सिंह पूरी विनम्रता के साथ खड़े थे और सोनिया को धन्यवाद किया। राष्ट्रपति ने भावी प्रधानमंत्री को बधाई दी।
जैसे ही यह बात फैली अफवाहें घर करने लगीं। कहा गया कि राष्ट्रपति ने सोनिया को प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ दिलाने से इनकार कर दिया है। कुछ ने कहा कि कलाम ने उन्हें दावा नहीं करने की सलाह दी है। कुछ पत्रकारों ने यह कहते हुए कलाम को नायक की तरह पेश किया कि उन्होंने सोनिया को प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्त नहीं कर देश के गर्व को कलंकित होने से बचा लिया है।
सोनिया की नागरिकता उनके लिए मुद्दा था। उच्चतम न्यायालय पहले ही इस पर फैसला कर चुका था। इसके बावजूद इस विषय पर कई ज्ञापन राष्ट्रपति के पास आते रहते थे। नायर ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में हमारे लिए यह पहले की तरह कोई मुद्दा नहीं रह गया था।
मीडिया में लिखी गई बातों से कलाम खिन्न थे। राष्ट्रपति भवन ने उसके बाद एक तीखा नोट जारी किया, जिसमें कहा गया कि ऐसे मीडिया के दावे सही नहीं है। नायर का कहना है कि कई मौकों पर यह मुद्दा सामने आया विशेष तौर पर जब कलाम के दूसरे कार्यकाल की बात चल रही थी।
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