थलसेना द्वारा खुद यह बात स्वीकार किया जाना रक्षा अनुसंधान कार्यों पर हो रहे अरबों रुपए के खर्च पर सवाल खड़ा करता है कि अर्जुन टैंकों का प्रदर्शन बहुत घटिया रहा है। थलसेना के एक प्रतिनिधि ने संसद की रक्षा मंत्रालय संबंधी स्थायी समिति के समक्ष पिछले दिनों स्वीकार किया कि अर्जुन टैंकों का कार्य निष्पादन बेहद घटिया रहा है और इससे पहले कि थलसेना अर्जुन टैंक से संतुष्ट हो सके इसमें बहुत से सुधार करने पड़ेंगे। समिति ने सेना की इस स्वीकारोक्ति पर बेहद हैरानी जताते हुए कहा है कि जो भी अर्जुन टैंक के विफल हो जाने के कारणों का अविलंब पता लगाया जाए और इसमें शीघ्रातिशीघ्र आवश्यक सुधार किए जाएँ ताकि इस टैंक को थलसेना द्वारा स्वीकार करने योग्य बनाया जा सके। समिति ने साथ ही इच्छा जताई है कि उसे अर्जुन टैंक के विनिर्माण और इसे सेवाओं में शामिल करने की समय सीमा से अवगत कराया जाए। बाला साहेब विखे पाटिल की अध्यक्षता वाली समिति ने हाल ही में संसद में पेश अपनी 29वीं रिपोर्ट में कहा है कि समिति ने अपने पूर्ववर्ती प्रतिवेदनों में यह सिफारिश की थी कि भारतीय थलसेना में शामिल करने के लिए पर्याप्त संख्या में मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन का विनिर्माण किया जाना चाहिए। तथापि समिति थलसेना के प्रतिनिधि से यह सुनकर हैरान है कि अर्जुन टैंकों का कार्य निष्पादन बहुत घटिया रहा है।
वेतन आयोग की सिफारिशों से असंतोष : रक्षा मंत्रालय संबंधी संसद की स्थायी समिति ने पिछले दिनों संसद में पेश अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट में खुलासा किया है कि सशस्त्र सैन्यकर्मी छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से संतुष्ट नहीं हैं और कुछ अधिकारियों ने सेवानिवृति लेने तक की इच्छा व्यक्त की है।
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