नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र द्वारा भारत में राजनीतिक शरण माँगने की अटकलों के बीच विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर स्पष्ट टिप्पणी करने से बचते हुए इसे काल्पनिक करार दिया। संविधान सभा चुनावों में माओवादियों के विजयी होने के बाद नेपाल नरेश द्वारा भारत में राजनीतिक शरण माँगे जाने की चर्चाओं के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि किसी ने शरण माँगी है। यह काल्पनिक सवाल है।
खबरों में कहा गया है कि ज्ञानेंद्र अपने पारिवारिक संबंधों का उपयोग कर भारत आ सकते हैं। मुखर्जी ने इस बात से इनकार किया कि भारत नेपाल की स्थिति का आकलन करने में सफल नहीं रहा। उन्होंने कहा कि स्थिति के गलत आकलन का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने माओवादियों से नेपाल में बहुदलीय लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने ऐसा किया है।
परमाणु करार की वकालत : भारत-अमेरिका परमाणु करार पर जारी गतिरोध के बीच मुखर्जी ने ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने के लिए विभिन्न देशों के साथ असैनिक परमाणु सहयोग की आज वकालत की।
भारत-अरब निवेश परियोजना सम्मेलन के दौरान मुखर्जी ने कहा विभिन्न देशों के साथ असैनिक परमाणु सहयोग ऊर्जा सुरक्षा के मकसद को पूरा करने में मददगार साबित होगा। ऊर्जा सुरक्षा को भारत के समक्ष एक प्रमुख आर्थिक चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत पेट्रोलियम समृद्ध देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग की संभावना तलाश रहा है।
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