सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के सामाजिक और आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया है। विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार शाम राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा लिए गए निर्णय से अवगत कराते हुए शुक्रवार को बताया कि उच्चतम न्यायालय ने जो भी सुझाया है, हम उसे लागू करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का विचार पूरी तरह स्पष्ट है और वह उच्च शिक्षा के लिए अवसरों तथा नौकरी में आरक्षण के बीच भेद करना चाहती है। मुखर्जी ने कहा कि क्रीमी लेयर की अवधारणा नौकरी में आरक्षण से है। 93वाँ संशोधन शिक्षण अवसरों के लिए है, जो सभी ओबीसी के लिए खुला है जिनमें क्रीमी लेयर भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अब उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया है कि ओबीसी के बीच क्रीमी लेयर उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ पाने की हकदार नहीं है। अदालत के इस फैसले से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भारतीय प्रबंधन संस्थानों समेत उच्च शिक्षण संस्थानों को संदेश जारी करने में मदद मिलने की संभावना है, जिन्होंने पहले दाखिला प्रक्रिया को स्थगित करने का फैसला किया था।
उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह आईआईटी, आईआईएम तथा अन्य केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण निर्धारित करने वाले विवादास्पद कानून को तो सही ठहराया था, लेकिन इसके दायरे से क्रीमी लेयर को बाहर कर दिया था।
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