आईआईटी से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों के लिए विदेशों में नौकरी करने की ललक धीरे-धीरे कम होती जा रही है और वे अपने ही देश में रहकर करियर बनाने को वरीयता दे रहे हैं।
आईआईटी स्नातकों का मानना है कि अगले दस साल में भारत में परिस्थितियाँ बहुत बेहतर होंगी। इवेल्यूसर्व के एक नवीनतम सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसमें कहा गया है कि आईआईटी से 2002 एवं उसके बाद के बैच के 84 प्रतिशत स्नातक देश में ही बने रहे।
1964 2000 के दौरान में केवल 65 प्रतिशत ऐसे स्नातक भारत में बने रहने को वरीयता दे रहे थे। इस सर्वेक्षण में 677 आईआईटी स्नातकों को शामिल किया गया और लगभग 49 प्रतिशत मानते हैं कि भारत में उन्हें बेहतर अवसर मिलेंगे।
इसमें कहा गया है कि 2006 में 90 प्रतिशत आईआईटी स्नातक भारत में ही बने रहे। अगर 2002 से पहले के आईआईटी स्नातकों की बात की जाए तो लगभग 60 प्रतिशत मानते थे कि विकसित देशों में बेहतर करियर के मौके हैं।
आने वाले दस वषों में करियर सफलता के लिहाज से श्रेष्ठ गंतव्य के बारे में पूछे जाने पर 72 प्रतिशत लोगों ने भारत का नाम लिया। इसमें 17 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका, पाँच प्रतिशत ने यूरोप तथा दो प्रतिशत ने चीन को चुना।
जो लोग अमेरिका को वरीयता देते हैं उनके लिए बेहतर अकादमिक अवसरों की बात सामने रहती है। वर्ष 2002 से पहले 70 प्रतिशत आईआईटी स्नातक अमेरिका जाते थे बाद में यह सँख्या 67 प्रतिशत हो गई।
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