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महँगाई को लेकर सरकार पर चौतरफा प्रहार
मित्र दलों ने भी सरकार को नहीं बख्शा
महँगाई के मुद्दे पर बुधवार को लोकसभा में सरकार पर उसके मित्र वामदलों और सम्पूर्ण विपक्ष ने चौतरफा हमला करते हुए कहा कि उसने सत्ता में बने रहने का अधिकार खो दिया है।

सदन में नियम 193 के तहत आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में निरंतर वृद्धि से उत्पन्न स्थिति तथा सरकार द्वारा इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में चर्चा शुरू करते हुए भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि लगता है कि देश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। बाजारी ताकतों के सामने आत्मसमर्पण करने वाली इस सरकार को अपने अस्तित्व को तर्कसंगत ठहराने के लिए जनता का विश्वास अर्जित करना होगा। उन्होंने कहा कि वामदलों ने पिछले चार वर्षों तक इस सरकार का समर्थन किया है पर हमें अफसोस है कि हमारा यह परीक्षण विफल रहा है।

उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा कि वह वामदलों के सुझावों को नजरअंदाज कर रही है। पिछले चार वर्षों में कृषि क्षेत्र में निवेश घटा है। महँगाई के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाया जाना चाहिए।

दासगुप्ता ने प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के महँगाई रोकने में मुश्किल होने संबंधी बयान पर कहा कि वे जब इतना असहाय महसूस करते हैं तो आम आदमी का क्या होगा।

भाजपा की श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि महँगाई मुद्दे पर सरकार पूरी तरह निष्क्रिय है और बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। आँकड़े पेट नहीं भर सकते। सरकार को आम आदमी को रोटी-दाल उपलब्ध कराने की नीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि सुपर पीएम द्वारा पीएम को पत्र लिखकर महँगाई रोकने को कहना क्या मजाक नहीं है? उन्होंने कहा कि यह आम धारणा है कि कांग्रेस के सत्ता में आते ही मूल्यवृद्धि शुरु हो जाती है।

कांग्रेस के सचिन पायलट ने कालाबाजारियों और जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के वास्ते आवश्यक वस्तु अधिनियम को मजबूत किए जाने की पुरजोर सिफारिश की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें महँगाई बढ़ाने वाले इन तत्वों से सख्ती से निपट सकें, इसके लिए यह बहुत जरूरी है।

मार्क्सवादी वासुदेव आचार्य ने महँघाई पर रोक लगाने में विफलता को संप्रग सरकार की सबसे बड़ी हार बताया। उन्होंने इस पर नियंत्रण के लिए कम से कम 25 कृषि उत्पादों पर वायदा व्यापार पर प्रतिबंध लगाने समेत कई सुझाव पेश किए।

सपा के मोहनसिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि महँगाई से निपटने में अगर सरकार ने ढील की तो सरकार और उसके सहयोगी दलों का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

राजद के देवेन्द्र प्रसाद यादव ने बढ़ती महँगाई को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि आयात सस्ता करने से भी इस पर काबू नहीं पाया जा सका है क्योंकि जितना शुल्क कम किया जाता है, निर्यातक देश उतना ही शुल्क बढ़ा देते हैं। बीजू जनता दल के बृजकिशोर त्रिपाठी ने महँगाई की स्थिति को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का नारा 'कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ' आज सबसे बड़ा मजाक बनकर रह गया है।

शिवसेना के चंद्रकांत खैरे ने महँगाई के लिए संप्रग सरकार की पिछले चार साल की नीतियों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण गेहूँ, चावल, मैदा, सूजी, सरसों तेल, डालडा, चाय पत्ती जैसी रोजमर्रा की वस्तुएँ काफी महँगी हो गई हैं।
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