मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > समाचार > राष्ट्रीय
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
तब भारत नहीं भेज सका पेंसिल
खाड़ी युद्ध के दौरान भारत इराकी बच्चों को पेंसिल नहीं उपलब्ध करा सका क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उसे ऐसा करने से रोक दिया था।

परिषद को आशंका थी कि पेंसिल में लगने वाले ग्रेफाइट का उपयोग व्यापक विनाशकारी हथियारों में किया जा सकता है। इसका खुलासा इराक में भारत के पूर्व राजदूत रंजीत कुमार कल्हा ने अपनी नई पुस्तक दि अल्टीमेट प्राइज में किया है।

युद्ध की विभीषिका से जूझ रहे इराक में शिक्षा व्यवस्था के पूरी तरह चौपट हो जाने के बाद बगदाद में भारतीय दूतावास ने स्थानीय छात्रों को पेंसिल मुहैया कराने की पेशकश की थी।

कल्हा हाल ही में विदेश मंत्रालय में सचिव पद से सेवानिवृत हुए हैं। उन्होंने अपनी किताब में कहा कि इराकी बच्चों की मदद के लिए हमने भारत से पेंसिल भेजने की योजना बनाई ताकि बच्चों को कम से कम स्कूल जाने में दिक्कत नहीं हो। लेकिन पेंसिल भेजने के पहले प्रस्ताव पर परिषद से मंजूरी लेनी थी।

कल्हा ने कहा कि हमारा प्रस्ताव महीनों तक परिषद की संबंधित समिति में पड़ा रहा और हमें कोई जवाब नहीं मिला। प्रस्ताव पर जोर देने के बाद आश्चर्यजनक तरीके से उसे खारिज कर दिया गया। इसका कारण बताया गया कि पेंसिल में ग्रेफाइट होता है और उसका 'दोहरा उपयोग' हो सकता है। उनकी किताब में गैर वगीकृत दस्तावेज भी शामिल किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि इराक द्वारा 1990 में कुवैत पर अधिकार जमा लेने के बाद सुरक्षा परिषद ने उसके खिलाफ प्रतिबंध लगा दिया था और अधिकतर आयात एवं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेखक अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं।
और भी
टाटा का सुप्रीम कोर्ट से आग्रह
महँगाई पर नहीं चलने दी राज्यसभा
कांग्रेस की चमचों को चेतावनी
महँगाई के सवाल पर लोकसभा स्थगित
शेयर बाजार में आतंकी नहीं-बंसल
अंगकोरवाट न्यू-7 वंडर्स में नहीं