पूरी अयोध्या सोमवार की दोपहर बारह बजते ही 'भये प्रकट कृपाला दीन दयाला' जैसी चौपाइयों और गीतों से गूँज उठी।
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार आज अर्थात चैत्र की नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था। इसी उपलक्ष्य में इस नवमी को 'रामनवमी' के रूप में भी मनाया जाता है।
रामनवमी के लिए हर वर्ष देश के कोने-कोने से यहाँ कई लाख श्रद्धालु पहुँचते हैं जो भोर से ही सरयू स्नान कर विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू कर देते हैं। यह सिलसिला आज भी जारी रहा और हजारों भक्तों ने सरयू में डुबकी लगाई।
मान्यताओं के अनुसार दोपहर बारह बजे के पूर्व इस क्रम में थोड़ी देर के लिए ठहराव आया क्योंकि इस समय भगवान श्रीराम के प्रतीकात्मक जन्म की तैयारी शुरू हो गई थी। श्रद्धालु भी यह विहंगम दृश्य देखने के लिए मंदिरों में पहुँचे।
बारह बजते ही लगभग पूरी अयोध्या में एक खास समाँ बंध गया। मंदिरों में बधाई और सोहर गीतों के सुर गूँजने लगे। अयोध्या के प्रसिद्ध कनक भवन मंदिर में विशेष रूप से श्रीरामजन्मोत्सव मनाया गया।
वैसे तो प्रत्येक मंदिर में राम जन्म होता है परन्तु कनक भवन मंदिर का आयोजन विशेष और आकर्षक है क्योंकि महोत्सव का केन्द्र यहीं होता है।
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