डाक सेवा की गति को और भी द्रुत बनाने तथा चिट्ठियों को सही समय पर सही स्थान तक पहुँचाने के उद्देश्य से भारतीय डाक विभाग ने अब पिनकोड को छह के बजाय आठ अंकों का करने का फैसला किया है।
डाक विभाग के निदेशक अशोक कुमार के अनुसार पिनकोड को छह के बजाय आठ अंकों का कर देने से डाक भेजने के काम में और भी तेजी आएगी तथा चिट्ठी-पत्री को सही समय पर लोगों तक पहुँचाने के काम में पहले की अपेक्षा और भी अधिक सफलता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि पिनकोड के अंत में बढ़ाए गए दो अंक डाकिए के कार्यक्षेत्र को दर्शाने का काम करेंगे, जिससे डाक की छँटनी में आसानी हो सके।
कुमार ने कहा कि समय के साथ डाक विभाग पर कार्य का बोझ बढ़ने के साथ ही जिम्मेदारियाँ भी बढ़ी हैं, इसलिए पिनकोड को छह के बजाय आठ अंक का करने का फैसला किया गया।
प्रयोग के तौर पर देश के कई स्थानों का चयन भी कर लिया गया है। पिनकोड के अंतिम दो अंक 01 से लेकर 99 तक हो सकते हैं।
पिनकोड को छह की जगह आठ अंकों का कर देने से अब अंतर्देशीय और लिफाफों पर अंकित छह खानों की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी।
पिनकोड के अंतिम दो अंक डाकिया के कार्यक्षेत्र की जानकारी देंगे, जिससे डाक की छँटनी करने में काफी आसानी होगी। मौजूदा व्यवस्था में मोहल्लों के नाम से डाक छाँटकर रखना पड़ती है।
कुमार ने बताया कि भविष्य में डाक छँटनी का काम मशीन के जरिये किए जाने की योजना है, ताकि समय की बचत हो सके और डाक छाँटने के काम से जुड़े कर्मचारियों को अन्य जिम्मेदारी सौंपी जा सके। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम डाक विभाग को अधिक से अधिक आधुनिक बनाने के लिए उठाए जा रहे हैं।
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