शराब के शौकीन लोगों को आने वाले महीनों में इस शौक को पूरा करने की ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ सकती है। देश में बढ़ती शीरे की लागत से शराब की कीमतों में बीस फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
उद्योग सूत्रों के मुताबिक शीरे की माँग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर की वजह से भारत में बनी विदेशी शराब (आईएमएफएल) वर्ग में सस्ते ब्रांड सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
ऑल इंडिया डिस्टिलरीज एसोसिएशन के अध्यक्ष देविन नारंग ने बताया इस साल देश में गन्ने का कम उत्पादन होने की वजह से शराब की कीमतों में करीब बीस फीसदी तक की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
गौरतलब है कि शराब बनाने में उपयोग होने वाली मूल सामग्री शीरे की पिछले साल बिक्री औसतन 2500 रुपए प्रति टन के भाव पर की गई थी लेकिन मौजूदा समय में इसके भाव 3300 रुपए प्रति टन के करीब हैं।
उन्होंने कहा कि देश में उपभोग की जाने वाली कुल शराब में शीरे से बनी शराब की हिस्सेदारी 95 फीसदी से ज्यादा है और शीरे की बढ़ती कीमतें शराब के दाम प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इससे कंपनियों को शराब के खुदरा मूल्य बढ़ाने को बाध्य होना पड़ सकता है। मौजूदा समय में आईएमएफएल वर्ग में सस्ते ब्रांडों में 8 पीएम, ओल्ड मांक और मैकडॉवेल जैसे ब्रांडों का दबदबा है।
हालाँकि यूनाइटेड स्प्रिट्स और डियाजियो जैसी कंपनियों ने अभी तक अपने ब्रांडों के दाम बढ़ाने की संभावना से इनकार किया है।
यूनाइटेड स्प्रिट्स के अध्यक्ष विजय रेखी ने यद्यपि स्वीकार किया कि पिछले तीन से पाँच सालों से शीरे की माँग तेजी से बढ़ रही है जिसकी वजह गैर पारंपरिक क्षेत्रों में शराब का उपभोग बढ़ना है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा शीरा और शराब के निर्यात की अनुमति दिए जाने के अलावा पेट्रोलियम उत्पादों में भी एथनाल के तौर पर शीरे का इस्तेमाल बढ़ रहा है। पारंपरिक क्षेत्रों में शीरे की खपत सालाना पंद्रह से बीस फीसदी की दर से बढ़ रही है।
उधर नारंग ने कहा कि गन्ना पेराई सीजन खत्म होने के करीब है जिसकी वजह से आगामी महीनों में शीरे की कीमत और तेजी से बढ़ सकती है। उन्होंने कहा- अगला पेराई का सीजन शुरू होने तक कीमतें घटने की कोई संभावना नहीं हैं।
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