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जिंदा है शमशाद का जादू आज भी...
'कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर' और 'कजरा मोहब्बत वाला अँखियों में ऐसा डाला' जैसे अनेक गानों को अपनी खास आवाज से विशिष्ट बना देने वाली बॉलीवुड की शुरूआती पार्श्व गायिका शमशाद बेगम के गीतों का जादू ब्लैक व्हाइट फिल्मों के जमाने में तो चला ही था रीमिक्स की धुनों पर नाचने वाली नई पीढ़ी पर भी उनके गीतों का सुरूर सिर चढ़कर बोल रहा है।

14 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में जन्मी शमशाद बेगम ने अपने करियर की शुरूआत रेडियो पेशावर से की और उन्होंने लाहौर और दिल्ली रेडियो स्टेशन के लिए भी काम किया।

उन्होंने अपना पहला कार्यक्रम 16 दिसंबर 1937 को लाहौर रेडियो पर पेश किया और जल्द ही श्रोताओं को अपनी मदमस्त आवाज का दीवाना बना लिया। एआईआर लाहौर ने नियमित तौर पर उनके गीतों का प्रसारण कर फिल्म जगत में उनके प्रवेश के लिए रास्ता बनाया।

उनकी सुरीली आवाज ने उस्ताद बख्शवाले साहब का ध्यान खींचा और उन्होंने शमशाद बेगम को अपनी शागिर्दी में ले लिया। लाहौर में रहने वाले संगीतकार गुलाम हैदर को उनकी विशिष्ट आवाज भा गई और उन्होंने उनकी आवाज का इस्तेमाल 'खजांची' (1941) और 'खानदान' (1942) जैसी फिल्मों में किया।

गुलाम हैदर 1944 में मुंबई आ गए और शमशाद बेगम भी उनके दल में शामिल होकर मायानगरी पहुँच गई। महबूब खान उस समय हुमाँयू (1944) नामक फिल्म बना रहे थे। इसमें संगीतकार के तौर पर गुलाम हैदर को रखा गया। हैदर ने शमशाद बेगम की आवाज का बखूबी इस्तेमाल किया। उस जमाने में अमीरबाई कर्नाटकी शीर्ष पार्श्व गायिका हुआ करती थीं।

शमशाद बेगम के रूप में बॉलीवुड में नई आवाज आने के बाद संगीतकारों में शमशाद बेगम की आवाज का इस्तेमाल करने की होड़-सी मच गई। ओपी नैयर, नौशाद, एसडी बर्मन जैसे संगीतकारों ने अपने करियर की शुरूआत में उनकी आवाज का जबर्दस्त इस्तेमाल किया और एक से बढ़कर एक सदाबहार गाने दिए।

शमशाद बेगम का जादू 1940 से लेकर 1960 के दशक के मध्य तक लोगों पर सिर चढ़कर बोला। शमशाद बेगम के बारे में एक और खास बात है कि बॉलीवुड का पहला पाश्चात्य गीत समझे जाने वाले 'आना मेरी जान...संडे के संडे' को भी उनकी ही आवाज के मोतियों में पिरोया गया था। इस गाने का संगीत सी.रामचंद्र ने दिया था।

किस्मत का गीत 'कजरा मोहब्बत वाला' उनका आखिरी गीत है। इसके अतिरिक्त 'ओ लागी लागी' (आन) किशोर दा के साथ 'मेरी नींदों में तुम मेरे ख्वाबों में तुम' (नया अंदाज) ' होली आई रे कन्हाई' (मदर इंडिया), 'सइयॉदिल में आना रे (बहार) 'पूछ मेरा क्या नाम रे नदी किनारे गांव रे' ( सीआईडी) जैसे उनके गीत आज भी लोगों को कर्णप्रिय लगते हैं।

शमशाद बेगम ने कई ग्रामोफोन कँपनियों के के लिए भक्ति गीत भी गाए। अपने जीवनकाल में उन्होंने 300 से अधिक गीत गाए। 10 अगस्त 1998 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत हमेशा लोगों को मंत्रमुग्ध करते रहेंगे।
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