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रिक्त सीटों को सामान्य श्रेणी से भरा जाए
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण पर उच्चतम न्यायालय के फैसले में दो न्यायाधीशों ने निर्देश दिया है कि यदि ओबीसी की रिक्त सीटों के लिए प्रत्याशी उपलब्ध न हों तो इन्हें सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से भरा जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति अरिजित पसायत ने अपने और न्यायमूर्ति सीके ठक्कर के लिए गए 10 अप्रैल के फैसले में व्यवस्था दी कि यदि केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए ओबीसी के प्रत्याशी न मिलें तो इन्हें सामान्य श्रेणी के छात्रों से भरा जाए।

दोनों न्यायाधीशों ने केन्द्र और राज्यों को यह भी निर्देश दिया कि कुल जनसंख्या में ओबीसी के वास्तविक प्रतिशत का पता लगाने के लिए जाति के सही आँकड़ों का पता लगाया जाए।

यदि ओबीसी के क्रीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर निकाल लिया जाएगा तो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पैरा स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए इस वर्ग के प्रत्याशी न मिलने से केन्द्र सरकार को 27 प्रतिशत आरक्षण सम्बन्धी फैसले को लागू करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इस वर्ग की शिक्षा की स्थिति खराब होने के कारण वे प्रवेश के लिए न्यूनतम पात्रता पूरी नहीं करेंगे।
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