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ओबीसी कोटा पर भ्रम नहीं-अर्जुनसिंह
सरकार ने आईआईटी और आईआईएम में 27 प्रश ओबीसी कोटा पर किसी भी प्रकार के भ्रम से इनकार कर कहा कि नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के संबंध में निर्देश जल्द ही जारी कर दिए जाएँगे।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुनसिंह ने यहाँ शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि सभी आईआईटी, आईआईएम व केंद्रीय विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया जाएगा कि वे आने वाले सत्र से ही आरक्षण को लागू करें।

कैबिनेट में चर्चा : केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र हुआ। सिंह का कहना था कि क्रीमीलेयर को लेकर कैबिनेट को तुरंत निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा इसी मुद्दे पर आरक्षण को लटकाया जा सकता है।

विचार-विमर्श जारी : मानव संसाधन विकास मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में नए शैक्षणिक वर्ष से प्रवेश पर आईआईएम व आईआईटी को चार-पाँच दिन में निर्देश जारी कर देगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस पर अभी विचार-विमर्श जारी है।

तैयार हैं : सूत्रों के अनुसार आमतौर पर आईआईटी और आईआईएम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार नया कोटा लागू करने के लिए तैयार हैं। हरेक संस्थान को केवल यह तय करना है कि वे पहले साल में किस हद तक कोटा लागू कर पाएँगे।

आईआईटी, मुंबई के निदेशक अशोक मिश्रा के अनुसार उनका संस्थान तीन चरणों में कोटा लागू करेगा। इसकी वजह मौजूदा ढाँचा अतिरिक्त छात्रों का एक साथ बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है। इस बीच, आईआईएम-अहमदाबाद के एक अधिकारी ने कहा कि नए शैक्षणिक वर्ष की प्रवेश सूची जारी करने में एक हफ्ते की देरी हो सकती है।

क्रीमीलेयर के कारण योग्य छात्र नहीं मिलेंगे : एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के अनुसार शैक्षणिक संस्थाओं में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कुछ बातें ऐसी हैं, जिन पर सरकार को समीक्षा-याचिका दायर करनी पड़ेगी।

क्रीमीलेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो फ्रेमवर्क निर्धारित किया है, उसकी वजह से कई जरूरतमंद लोग इसके लाभ से वंचित हो जाएँगे और योग्य छात्र नहीं मिल पाएँगे। उन्होंने कहा कि क्रीमीलेयर के सवाल पर पिछड़े वर्ग के नेताओं व सांसदों ने अपनी गहरी आशंकाएँ जाहिर की हैं, जिनका समाधान सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि क्रीमीलेयर की अवधारणा को खारिज नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमीलेयर के संबंध में ढाई लाख रु. प्रतिवर्ष की आय वाले परिवार को बाहर रखा है, जिसकी वजह से उच्च शिक्षा के लिए योग्य छात्र मिलना कठिन होगा।

केंद्र सरकार चाहती है कि यह आय सीमा 3 लाख रु. तक बढ़ाई जानी चाहिए। पिछड़े वर्ग के नेता चाहते हैं कि स्नातकोत्तर स्तर पर भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सुविधा स्नातक स्तर पर ही देने का प्रावधान किया है। स्नातकोत्तर स्तर पर मेरिट के आधार पर ही प्रवेश मिलेगा।
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