रेलमंत्री लालूप्रसाद यादव ने शुक्रवार को कहा कि छठे वेतन की विषमताओं को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने गौर करने का आश्वासन दिया है।
यादव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रधानमंत्री से इस बारे में बातचीत की है, जिस पर सकारात्मक आश्वासन मिला है।
यादव ने बताया कि वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के संबंध में केबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी (इमपॉवर्ड कमेटी) के गठन की परंपरा है।
इस बार भी कमेटी का गठन हो रहा है, जिसमें रेलवे के एक सदस्य समेत 12 सदस्य होंगे। यह कमेटी रेलमंत्री की माँग पर विचार करते हुए कोई फैसला लेगी। रेलमंत्री ने कहा कि छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट विषमतामूलक समाज को बढ़ावा देगी। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और चौड़ी होगी।
उन्होंने पाँचवे वेतन आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें अधिकतम और न्यूनतम वेतन का अंतर दस गुना था। मतलब यह है कि यदि चपरासी का वेतन एक रूपया है तो सबसे बडे़ अधिकारी का वेतन 10 रूपए लेकिन छठे आयोग की रिपोर्ट से यह अंतर बारह गुना हो जाएगा।
ऐसी हालत में कमजोर तबका मुख्यधारा में आना तो दूर वह और पीछे चला जाएगा। रिपोर्ट से रेलवे के चतुर्थवर्गीय और तृतीयवर्गीय कर्मचारियों के साथ-साथ समूह ब के अधिकारी भी काफी दुखी हैं।
उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट से रेलवे की सभी यूनियनें भड़कीं हुई हैं और वे रोज हड़ताल की धमकी दे रहे हैं। यदि रिपोर्ट को यूँ ही लागू कर दिया जाए तो यूनियने रेलगाड़ी का चक्का जाम कर देंगे।
यदि रेलगाड़ी चलानी है तो रिपोर्ट में फेरबदल करना होगा। उन्होंने कहा कि छठे वेतन आयोग ने राकेश मोहन कमेटी के नजरिए से रेलवे को देखा है। वह यह भूल गया कि पिछले चार वर्षों में रेलवे का कायाकल्प हो गया है और 25 हजार विदेशी बाजारों में तेजी से भारतीय बाजार भी सुधरे हैं।
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